जैन मंदिरों में उत्तम अकिंचन धर्म की पूजा संपन्न:पंडित पारस बोले- आत्मा के अतिरिक्त संसार में कुछ भी अपना नहीं
छपरौली के श्री 1008 भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर और भगवान महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के तहत बृहस्पतिवार को 'उत्तम अकिंचन धर्म' की विशेष पूजा-अर्चना की गई। सुबह भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और विधान संपन्न हुआ, जिसके बाद शाम को भव्य आरती व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए पंडित पारस जैन शास्त्री ने कहा कि आत्मा के अतिरिक्त संसार में कुछ भी अपना नहीं है, और इस भाव को जागृत करना ही उत्तम अकिंचन धर्म का सार है। उन्होंने बताया कि क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य और त्याग जैसे धर्मों से साधक बुराइयां छोड़ता है, जबकि अकिंचन धर्म उस अच्छाई के प्रति भी आसक्ति छोड़ने की प्रेरणा देता है। संसार की किसी भी भौतिक वस्तु को अपना मानना केवल एक भ्रम है। पंडित शास्त्री ने कहा कि दशलक्षण पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को इतना निर्मल बनाना है कि वह जन्म-मरण के दुखों से सदा के लिए मुक्त हो जाए। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुज जैन, राजेश जैन, अमित जैन, अनिल जैन, भुनेंद्र जैन, दीपक जैन, राजीव जैन और दिलीप मिश्रा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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