जौनपुर में लेखपालों ने तहसील दिवस का बहिष्कार किया:2800 ग्रेड पे, लंबित पदोन्नति और ट्रांसफर की मांग; बोले- आश्वासन नहीं, फैसला चाहिए
जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को लेखपालों ने तहसील दिवस का बहिष्कार कर प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के तहसील अध्यक्ष विक्रांत सिंह चौहान के नेतृत्व में सैकड़ों लेखपाल 8 सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे। लेखपालों ने सरकार से लंबित प्रस्तावों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। लेखपालों की प्रमुख मांग 2800 ग्रेड पे और वेतन विसंगति दूर करने की है। उनका कहना है कि पिछले 10 साल से 2800 ग्रेड पे की मांग लंबित है। राजस्व परिषद ने भी लेखपालों के काम को देखते हुए लेवल-5 यानी ग्रेड पे 2800 की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार की ओर से अब तक इस पर फैसला नहीं लिया गया। 8 साल से इंटर-डिविजनल ट्रांसफर नहीं लेखपालों ने बताया कि पिछले 8 साल से इंटर-डिविजनल ट्रांसफर नहीं हुए हैं। इससे करीब 2700 लेखपाल अपने गृह जिले से दूर काम कर रहे हैं। चयन वर्ष 2025-26 की पदोन्नति सूची भी करीब 12 महीने से लंबित है। इसके अलावा चयन वर्ष 2024 में नियुक्त नए लेखपालों की प्रशिक्षण परीक्षा के परिणाम और प्रमाण पत्र भी 12 महीने बाद तक जारी नहीं किए गए हैं। लेखपालों ने 16 साल से भत्तों में बढ़ोतरी नहीं होने की बात भी कही। स्टेशनरी भत्ता 100 से 500 रुपए करने की मांग लेखपाल संघ ने स्टेशनरी भत्ता 100 से बढ़ाकर 500 रुपए प्रतिमाह करने की मांग की है। नियत यात्रा भत्ते की जगह 1500 रुपए प्रतिमाह मोटरसाइकिल भत्ता और विशेष भत्ता 100 से बढ़ाकर 1000 रुपए करने की मांग भी रखी गई है। मूल काम के बजाय दूसरे काम कराने का आरोप लेखपालों का कहना है कि उन्हें भूलेख कार्यालयों और पटलों पर पटल सहायक या प्रभारी राजस्व निरीक्षक का काम दिया जा रहा है। इससे राजस्व के मूल काम पर असर पड़ रहा है और उन पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ रहा है। लेखपालों ने इसे 1 जून 2017 और 2 अगस्त 2026 के परिषदादेश के विपरीत बताया। उन्होंने अटैच किए गए लेखपालों को उनके मूल काम पर वापस भेजने और लंबित प्रस्तावों को तत्काल मंजूरी देने की मांग की। ग्राम सचिवालयों में सुविधाएं नहीं होने की शिकायत लेखपालों ने ग्राम सचिवालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि अधिकांश ग्राम सचिवालयों में लेखपालों के लिए अलग कमरा, फर्नीचर, सुरक्षित रिकॉर्ड रूम, कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली, पीने का पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं नहीं हैं। लेखपालों के मुताबिक, एक लेखपाल को चार-पांच गांवों का काम देखना पड़ता है। आय, जाति, निवास और विरासत जैसी जांच के लिए उन्हें अलग-अलग गांवों में जाना पड़ता है। ऐसे में एक ही जगह बैठकर काम करना संभव नहीं है। इस संबंध में 30 जून 2026 को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एंटी करप्शन कार्रवाई को लेकर जताई चिंता लेखपालों ने एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि 20 अगस्त 2026 को अयोध्या के सोहावल तहसील में लेखपाल उत्कर्षदीप सरकारी काम कर रहे थे। इसी दौरान एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई का मामला सामने आया। लेखपाल संघ ने इसे ‘जबरन ट्रैपिंग’ बताते हुए कहा कि घटना से कर्मचारियों में डर और चिंता का माहौल है। लेखपालों ने सरकार से सभी लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेने के साथ पिछले 10 साल से चली आ रही लेखपाल पद को तकनीकी घोषित करने की मांग भी पूरी करने की अपील की।
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