झाँसी में जलविहार पर्व मनाया:गाजे-बाजे के साथ निकले भगवान के विमान, तालाब में कराया गया जलाभिषेक
झाँसी में जलविहार पर्व के पावन अवसर पर भव्य धार्मिक माहौल के बीच विभिन्न प्रमुख मंदिरों से भगवान के देव विमान (डोले) निकाले गए। गोविंद जी, भगवान बालाजी और राधा-कृष्ण मंदिर सहित अन्य देवालयों में प्रभु का मनमोहक श्रृंगार कर उन्हें सुसज्जित विमानों में विराजमान किया गया। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने पूरे भक्ति भाव से देव विमानों को अपने कंधों पर उठाकर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। रास्ते भर भक्तों का अद्भुत उत्साह देखने को मिला। गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु आगे बढ़े। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर प्रभु की आरती उतारी। वहीं, पुरानी मान्यताओं के अनुसार लोगों ने देव विमानों के नीचे से निकलकर भगवान से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए यह भव्य यात्रा स्थानीय तालाब माता मंदिर पहुंची। यहां मुख्य पुजारी भोले महाराज और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भगवान का जलाभिषेक कर उन्हें पारंपरिक जलविहार कराया गया। देर शाम सभी देव विमान अपने-अपने मंदिरों में वापस पहुंचे, जहां महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह है पौराणिक मान्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के उपरांत भाद्रपद मास की पद्मा (परिवर्तिनी) एकादशी के दिन माता यशोदा उन्हें पहली बार स्नान व पूजन के लिए यमुना नदी के घाट पर ले गई थीं। इसी पौराणिक कथा और परंपरा का निर्वहन करते हुए सदियों से एकादशी के दिन भगवान के देव विमानों को जलाशयों में जलविहार कराने और नगर यात्रा निकालने की यह पावन प्रथा चली आ रही है।
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