जनकपुरी महोत्सव: विवाह सम्पन्न, श्रीराम संग चली सिया:6अक्टूबर से 9 अक्टूबर आगरा में नजर त्रेता युग, देखे वीडियो
आगरा के भावना एस्टेट रोड पर सजी जनकपुरी में छह अक्टूबर से शुरू हुए विवाह उत्सव का समापन नौ अक्टूबर को माता सीता की विदाई के साथ हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, आरती और स्वरूपों के दर्शन के बाद जब विदाई की घड़ी आई तो मिथिलावासियों की आंखें नम हो गईं। लोगों को ऐसा महसूस हुआ, मानो उनके घर की बेटी विदा हो रही हो। किसी ने भावुक होकर माता सीता को विदा किया तो किसी की आंखें भर आईं। जनकपुरी महोत्सव में चार दिनों तक चले प्रमुख आयोजनों में राम बारात के स्वागत से लेकर तुलसी-शालिग्राम विवाह, नगर भ्रमण, बड़हार की दावत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। छह अक्टूबर को निकली राम बारात महोत्सव के प्रमुख आयोजनों की शुरुआत छह अक्टूबर को राम बारात के निकलने से हुई। श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों के साथ निकली बारात को देखने के लिए शहर में जगह-जगह श्रद्धालु जुटे। इसके बाद सात अक्टूबर को भावना एस्टेट रोड पर सजी जनकपुरी में बारात का भव्य स्वागत किया गया। जनक महल पर श्रीराम, माता सीता और चारों भाइयों के स्वरूप पहुंचे तो श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ उनका अभिनंदन किया। राजा जनक और रानी सुनैना की ओर से मिथिला की परंपराओं के अनुसार स्वागत किया गया। स्वरूपों की आरती उतारी गई। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल सहित कई राजनीतिक और गणमान्य लोग मौजूद रहे। इसी दिन भावनेश्वर मंदिर में तुलसी-शालिग्राम विवाह का आयोजन भी हुआ। शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालुओं ने जनक महल पर स्वरूपों के दर्शन किए। आठ अक्टूबर को नगर भ्रमण और बड़हार की दावत महोत्सव के दूसरे दिन श्रीराम और उनके भाइयों के स्वरूपों ने घुड़सवारी करते हुए गोधूलि बेला में नगर भ्रमण किया। माता सीता रथ पर विराजमान होकर निकलीं। रास्ते में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और जयकारे लगाए। नगर भ्रमण के बाद स्वरूप जनक महल पहुंचे, जहां राजा जनक और राजा दशरथ की ओर से उनका स्वागत और आरती की गई। दिन में राजा जनक की ओर से पारंपरिक बड़हार की दावत आयोजित की गई। मिथिला की इस परंपरा में बेटी के विवाह के बाद उसके वर और बारात के स्वागत-सत्कार का विशेष महत्व है। शाम को श्रीराम भजन संध्या में भक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई। जनकपुरी की रोशनी, सजावट और श्रद्धालुओं की भीड़ ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बनाए रखा। नौ अक्टूबर को विदाई के साथ भावुक हुआ माहौल महोत्सव के अंतिम प्रमुख दिन जनक महल पर स्वरूप दर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। करीब 140 फीट ऊंचे जनक महल और लगभग 60 फीट ऊंचे मुख्य मंच पर सजे दरबार में श्रद्धालुओं ने श्रीराम, माता सीता और अन्य स्वरूपों के दर्शन किए। शाम को धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के बाद विदाई की रस्म हुई। माता सीता के विदा होते ही मिथिला की बेटी को विदा करने जैसा माहौल बन गया। जनकपुरी में कई दिनों से चल रही चहल-पहल के बीच विदाई ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। लोगों ने नम आंखों से माता सीता और अन्य स्वरूपों को विदा किया। इस तरह जनकपुरी महोत्सव ने आगरा में मिथिला की विवाह परंपराओं, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।
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