जन्म-मृत्यु पंजीकरण को लेकर नया आदेश:संतकबीर नगर में 2 साल से ज्यादा पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश जरूरी होगा
संतकबीरनगर जिले के लिए प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब एलर्ट रहने की जरूरत है। जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में देरी अब मुश्किलें बढ़ाएगी। सरकार ने देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन के लिए प्रक्रिया और अधिकारी तय किए हैं। दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। एडीओ पंचायत राधेश्याम चौधरी ने बताया कि 21 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन मुफ्त होगा। 21 से 30 दिन के बीच तय फीस लगेगी। 30 दिन से एक साल तक के लिए सहायक विकास अधिकारी की अनुमति, शपथ पत्र और विलंब शुल्क जरूरी है। एक से दो साल तक के लिए डीएम या एसडीएम का आदेश, जांच रिपोर्ट और शुल्क देना होगा। दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का आदेश, सत्यापन रिपोर्ट और नियमित शुल्क लगेगा। कोर्ट के आदेश की संख्या और तारीख सीआरएस पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके बिना रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यह व्यवस्था पारदर्शिता लाने और फर्जी सर्टिफिकेट रोकने के लिए है। लोगों से समय पर रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की गई है। जन्म-मृत्यु का समय से पंजीकरण नहीं कराने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शासन ने विलंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए अलग-अलग समय सीमा के अनुसार प्रक्रिया व सक्षम अधिकारी तय किए हैं। नई व्यवस्था के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना पंजीकरण नहीं हो सकेगा। उन्होंने लोगों से अपील की। परेशानी से बचने के लिए समय से पंजीकरण कराएं। कोर्ट के आदेश का ब्योरा होगा ऑनलाइन दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु पंजीकरण के मामलों में अब प्रक्रिया सीआरएस पोर्टल के जरिए आगे बढ़ेगी। न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद उसकी आदेश संख्या और दिनांक पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके बिना पंजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। व्यवस्था का उद्देश्य विलंबित पंजीकरण में पारदर्शिता लाना और फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना है। संबंधित अधिकारियों को भी पोर्टल पर दर्ज विवरण की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई करनी होगी। इस प्रक्रिया होगा गुजरना ● 0-21 दिन के अन्दर ग्राम पंचायत सचिव से निःशुल्क ● 21-30 दिन के अन्दर ग्राम पंचायत सचिव से विलम्ब शुल्क के साथ
● 30 दिन से 1 वर्ष सहायक विकास अधिकारी से विलम्ब शुल्क व साक्ष्य के साथ शपथ पत्र
● 1 से 2 वर्ष तक डीएम या एसडीएम, सचिव की जांच अख्या, शपथपत्र व निर्धारित विलंब शुल्क
● 2 वर्ष से अधिक के मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का आदेश, सत्यापन आख्या व नियमित शुल्क
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