जनता-दर्शन में पहुंची दिव्यांग श्रुति का स्कूल में कराया दाखिला:जालौन में मिलने पहुंचे डीएम, बोले- परिस्थितियां किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए

Oct 14, 2026 - 12:55
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जनता-दर्शन में पहुंची दिव्यांग श्रुति का स्कूल में कराया दाखिला:जालौन में मिलने पहुंचे डीएम, बोले- परिस्थितियां किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए
जालौन में जनता दर्शन में अपने पिता के साथ पहुंची दिव्यांग बालिका श्रुति की शिक्षा सुनिश्चित कराने के लिए जिला प्रशासन की पहल रंग लाने लगी है। विद्यालय में दाखिला होने के बाद बुधवार को जिलाधिकारी समीर स्वयं उच्च प्राथमिक विद्यालय, काशीराम कॉलोनी पहुंचे। यहां उन्होंने श्रुति से मुलाकात कर उसकी पढ़ाई और विद्यालय के अनुभवों के बारे में जानकारी ली। साथ ही उसका उत्साह बढ़ाते हुए नियमित रूप से पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो जिलाधिकारी ने कहा कि कोई भी बच्चा परिस्थितियों के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को अपनी प्रतिभा निखारने और जीवन में आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का रास्ता भी दिखाती है। दरअसल, नौ अक्टूबर को श्रुति अपने पिता भगत सिंह निवासी पाठकपुरा, उरई के साथ जिलाधिकारी के जनता दर्शन में पहुंची थी। सुनवाई के दौरान पता चला कि पारिवारिक परिस्थितियों और शारीरिक दिव्यांगता के चलते बालिका औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रही थी। इस पर जिलाधिकारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उसकी पढ़ाई की व्यवस्था कराने और विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। श्रुति की शिक्षा को लेकर शिक्षकों से जोर प्रशासन के प्रयासों के बाद श्रुति का उच्च प्राथमिक विद्यालय, काशीराम कॉलोनी, उरई में दाखिला कराया गया। बुधवार को जिलाधिकारी ने विद्यालय पहुंचकर उससे बातचीत की और पढ़ाई के प्रति उसकी रुचि के बारे में जाना। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों से भी बालिका की शिक्षा को लेकर आवश्यक सहयोग देने पर जोर दिया। बालिका को सीखने और अपनी क्षमताओं को विकसित करके का अवसर मिलेगा डीएम ने कहा कि सामान्य बच्चों के साथ विद्यालय में पढ़ने से श्रुति को सीखने, समझने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल दाखिला कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि बालिका की पढ़ाई नियमित रूप से जारी रहे और उसे किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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