कानपुर देहात के हाशेमऊ में एमएससी छात्र का कुल्हड़ कारोबार:रोजाना 25 हजार उत्पादन से 10 लोगों को रोजगार, नौकरी के पीछे नहीं भागे आशीष

Oct 20, 2026 - 10:19
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कानपुर देहात के हाशेमऊ में एमएससी छात्र का कुल्हड़ कारोबार:रोजाना 25 हजार उत्पादन से 10 लोगों को रोजगार, नौकरी के पीछे नहीं भागे आशीष
आज के दौर में जहां बड़ी संख्या में युवा नौकरी की तलाश में परेशान हैं और रोजगार के लिए घर-परिवार से दूर दूसरे शहरों का रुख कर रहे हैं, वहीं कानपुर देहात के हाशेमऊ गांव निवासी 24 वर्षीय आशीष कुमार ने अपने गांव में ही रोजगार का रास्ता तलाश लिया। नौकरी के पीछे भागने के बजाय उन्होंने खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। आज वह अपनी मेहनत से न केवल अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि आसपास के करीब 10 लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। खास बात यह है कि आशीष एमएससी की पढ़ाई के साथ अपने कारोबार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। आशीष के पिता उमाशंकर खेती-किसानी करते हैं। परिवार का खेती से जुड़ा काम जारी है, जबकि आशीष ने करीब ढाई साल पहले मिट्टी के कुल्हड़ बनाने का कारोबार शुरू किया। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री माटी कला योजना के तहत 4 लाख रुपये का लोन लिया। मेहनत और लगन से उन्होंने धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाया। शुरुआत में देखा गया सपना अब छोटे उद्योग का रूप ले चुका है। उनके कारखाने में प्रतिदिन करीब 25 हजार कुल्हड़ों का उत्पादन हो रहा है। आशीष के कारोबार को आगे बढ़ाने में उनका परिवार भी बराबर सहयोग कर रहा है। पिता उमाशंकर खेती-किसानी के साथ कारोबार में हाथ बंटाते हैं, जबकि मां भी काम में सहयोग करती हैं। परिवार के समर्थन और आशीष की मेहनत से कारखाने में आसपास के करीब 10 लोगों को काम मिला है। कारखाने में कोई कुल्हड़ों को आकार देने में जुटा है, तो कोई उन्हें सुखाने और भट्ठी में तैयार करने का काम करता है। मिट्टी को आकार देकर उपयोगी उत्पाद बनाने की यह प्रक्रिया कई लोगों की रोजी-रोटी का सहारा बन गई है। आशीष का उद्देश्य केवल खुद के लिए कमाई का जरिया तैयार करना नहीं, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी काम उपलब्ध कराना है। चाय, दूध और लस्सी के लिए बनते हैं अलग-अलग कुल्हड़ आशीष के कारखाने में चाय, दूध और लस्सी के लिए अलग-अलग तरह के कुल्हड़ तैयार किए जाते हैं। तैयार उत्पादों की जिले के विभिन्न इलाकों में सप्लाई की जाती है। प्रतिदिन हजारों कुल्हड़ों का उत्पादन करने वाला यह कारोबार स्थानीय बाजार की मांग पूरी करने के साथ ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है। एप्पल मोबाइल दिखाकर बताया, मेहनत से पूरे हो रहे सपने अपने कारोबार के बारे में बताते हुए आशीष ने एप्पल कंपनी का मोबाइल फोन दिखाया और कहा कि मेहनत करके अब वह अपने सपनों को भी पूरा कर पा रहे हैं। उनके लिए यह केवल मोबाइल फोन नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और मेहनत से आगे बढ़ने का प्रतीक है। आशीष का कहना है कि गांव में रहकर काम करने से वह परिवार के साथ भी रह पाते हैं और कारोबार को भी समय दे पाते हैं। दूसरे शहर में नौकरी तलाशने के बजाय उन्होंने अपने ही क्षेत्र में कुछ करने का रास्ता चुना। प्लास्टिक के विकल्प के रूप में मिट्टी के उत्पाद आशीष मिट्टी के कुल्हड़ बनाने के काम को पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की दिशा में मिट्टी से बने उत्पाद बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कुल्हड़ों के उपयोग को बढ़ावा मिलने से पारंपरिक मिट्टी के उत्पादों की मांग बढ़ सकती है और कुम्हारों व स्थानीय कामगारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। युवाओं को दिया खुद का कारोबार शुरू करने का संदेश आशीष की कहानी बताती है कि रोजगार के अवसर तलाशने के लिए हमेशा बड़े शहरों का रुख करना जरूरी नहीं है। सही योजना, मेहनत और परिवार के सहयोग से गांव में भी अपना कारोबार खड़ा किया जा सकता है। एमएससी की पढ़ाई के साथ प्रतिदिन करीब 25 हजार कुल्हड़ों का उत्पादन संभालना और आसपास के 10 लोगों को रोजगार देना उनकी इसी सोच को दर्शाता है। आशीष का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं और नौकरी तलाशने के बजाय दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करने का सपना देखते हैं।

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