कानपुर देहात में सपा नेताओं पर मुकदमे को लेकर विवाद:सपा नेता बोले- प्रदर्शन में थे ही नहीं, फिर भी मुकदमे में नाम
कानपुर देहात में रविवार को सपा के प्रदर्शन के बाद दर्ज मुकदमे को लेकर अब सियासत गरमा गई है। पुलिस ने सपा जिलाध्यक्ष बबलू राजा, पूर्व मंत्री शिव कुमार बेरिया, पूर्व सांसद राजाराम पाल समेत 36 नामजद और करीब 200 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। नामजद सपा नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ ऐसे लोगों को भी मुकदमे में शामिल किया गया, जो प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद ही नहीं थे। सपा के जिला सचिव हिम्मत यादव ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान वह माती मुख्यालय में मौजूद नहीं थे। उनके मुताबिक, रविवार सुबह करीब 4 बजे पुलिस उनके घर पहुंच गई थी और दोपहर करीब ढाई बजे तक उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया। हिम्मत यादव ने कहा कि माती मुख्यालय उनके घर से करीब 30 किलोमीटर दूर है। जिस समय वहां प्रदर्शन हुआ, उस दौरान वह पुलिस की निगरानी में अपने घर पर थे। इसके बावजूद मुकदमे में उनका नाम शामिल कर दिया गया। कुछ और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल करने का दावा सपा नेता ने आरोप लगाया कि उनके अलावा सुरेश सक्सेना, पवन यादव और बलवंत यादव समेत कुछ अन्य कार्यकर्ता भी प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद उन्हें मुकदमे में नामजद किया गया है। उन्होंने पुलिस से कहा कि अगर प्रदर्शन के दौरान उनके मौके पर मौजूद होने का कोई सबूत है तो उसे सामने लाया जाए। हिम्मत यादव का दावा है कि उनके पास घर में नजरबंद रहने के सबूत मौजूद हैं और वह पूरे मामले को सपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाएंगे। पुलिस तहरीर में धक्का-मुक्की और जाम का आरोप पुलिस की तहरीर के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति पैदल मार्च किया। इस दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की, सड़क जाम और पुतला दहन का प्रयास किए जाने समेत कई आरोप लगाए गए हैं। अब सपा नेता के आरोपों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि प्रदर्शन के समय कौन-कौन मौके पर मौजूद था और मुकदमे में नामजद लोगों की क्या भूमिका थी। हिम्मत यादव के आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
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