कानपुर में 18Kg चांदी चोरी करने वाले बाप-बेटा अरेस्ट:कैंसर से पीड़ित दादी के इलाज के लिए चार लाख कर्ज लिया था, एक आरोपी फरार
कानपुर के चकेरी में सराफा कारोबारी के कारखाने से 18 किलो चांदी चोरी करने के मामले में पुलिस ने अमेठी के मोहनगंज निवासी पिता-पुत्र को अरेस्ट किया है। पूछताछ में 6वीं पास आरोपी ने बताया कि उसकी दादी कैंसर की बीमारी से ग्रसित थीं, जिनके इलाज के लिए उसने करीब 4 लाख का प्राइवेट लोन ले रखा था। लोन न चुका पाने पर लगातार ब्याज बढ़ता जा रहा था। जिसके बाद उसने वारदात को अंजाम दिया। कारखाने से 18 किलो चांदी चोरी करने के बाद आरोपी ने अपने पिता को जानकारी दी थी। पिता ने चोरी की चांदी बेचने के लिए एक एजेंट से संपर्क किया था, जिसने रायबरेली के बड़े कारोबारी के यहां चांदी बिकवाने की बात तय की थी। मामले में फरार एजेंट की पुलिस तलाश में है। सोमवार को वारदात को दिया था अंजाम चकेरी के पोखरपुर में नौबस्ता निवासी सराफा नितिन तूपे का चांदी गलाने का कारखाना है। सोमवार की तड़के सुबह करीब तीन बजे एक चोर पड़ोसी की दीवार से होकर उनके कारखाने की छत पर पहुंचा और जाल की टूटी सरिया में रस्सी बांधकर नीचे उतरा। इसके बाद नौ मिनट में कारखाने में रखा 18 किलो चांदी (पाउडर फॉर्म में) का लड्डू लेकर भाग निकला था। चोरी हुई चांदी की कीमत करीब 47 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस की जांच में वह सीसीटीवी कैमरों में दिखाई दिया था। जिसके बाद 350 सीसीटीवी कैमरे खंगालते हुए पुलिस चोर तक पहुंच गई। डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता, एडीसीपी शिवा सिंह ने बुधवार को घटना का खुलासा करते हुए बताया कि मामले में दो आरोपियों मोहनगंज निवासी विकास यादव व उसके पिता बसंत लाल को अरेस्ट किया गया है। 6 माह पहले कारखाने में काम करने आया था विकास 6वीं पास है, वह मजदूरी करता था। डीसीपी ने बताया कि 6 माह पहले विकास सराफ नितिन तूपे के कारखाने में काम करने आया था। विकास का एक भाई नितिन तूपे के कारखाने के पड़ोस में स्थित गुड्डू बाबू की दालमिल में काम करता था, जिस पर विकास का वहां आना-जाना था। काम करने के दौरान विकास को कारखाने में चांदी रखे होने की जानकारी मिल गई थी। डीसीपी ने बताया कि विकास की दादी कैंसर की बीमारी से ग्रसित है, जिनका इलाज गांव के पास ही स्थित कस्बा शंकरगंज बाजार स्थित हास्पिटल से चल रहा था। बीमारी के कारण विकास यादव पर चार लाख का कर्ज हो गया था, जिसका वह ब्याज दे रहा था। बीमारी के कारण उसने अपनी खेती भी गिरवी रख दी थी। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण विकास यादव अपनी दादी को चकेरी निवासी अपनी बुआ के घर पर रखकर इलाज करा रही थी, जहां उनकी देखरेख विकास की चाची करा रही थीं, जो आए दिन विकास को कर्ज का ताना दिया करती थी। खबर अपडेट की जा रही है…
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