कानपुर में सदन में महिला पार्षद से धक्का-मुक्की का मामला:पुलिस कमिश्नर से मिले 15 पार्षद, बोले-लक्ष्मी की शिकायत निरस्त हो
कानपुर नगर निगम सदन में महिला पार्षद लक्ष्मी कोरी से कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला अब भाजपा पार्षदों के बीच विवाद का रूप लेता दिख रहा है। शुक्रवार को भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित के नेतृत्व में 15 पार्षद पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुंचे। उन्होंने लक्ष्मी कोरी की ओर से पांच भाजपा पार्षदों के खिलाफ दी गई शिकायत को निरस्त करने की मांग की। नवीन पंडित का कहना है कि सदन में बहस और कहासुनी होती रहती है। अगर लक्ष्मी कोरी को किसी बात से आपत्ति थी, तो उन्हें महापौर या पार्टी संगठन के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी। उधर, लक्ष्मी कोरी ने आरोप लगाया है कि 26 सितंबर को सदन की कार्यवाही के दौरान उन्हें घेरकर गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई थी। शुक्रवार को भाजपा पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से मिलने पहुंचा। 2 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण कार्यालय में मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद पार्षद पुलिस कमिश्नर के बंगले पहुंचे। पुलिस कमिश्नर नहीं मिले तो बंगले पहुंचे पार्षद नवीन पंडित ने कहा कि सदन में उस दिन शहर की गंभीर समस्याओं पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान वार्ड-10 की पार्षद लक्ष्मी कोरी महापौर प्रमिला पांडेय के सामने ऊंची आवाज में बोलने लगीं। तभी पार्षद आलोक पांडेय भी वहां आ गए और आत्महत्या की बात कहते हुए हंगामा करने लगे। उनके मुताबिक, महापौर ने दोनों को शांत कराने की कोशिश की। इसके बावजूद लक्ष्मी कोरी बोलती रहीं। जब दूसरे पार्षदों ने समय बर्बाद नहीं करने की बात कही, तो आलोक पांडेय सदन से बाहर चले गए और लक्ष्मी कोरी अपनी सीट पर बैठ गईं। 'सदन की बात सदन तक रहनी चाहिए' नवीन पंडित ने कहा कि सदन में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं। ऐसे मामलों को पुलिस तक ले जाने के बजाय पार्टी संगठन या महापौर के सामने उठाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विधानसभा में भी कार्यवाही के दौरान हंगामा होता है, लेकिन हर बार इस तरह पुलिस में शिकायत नहीं की जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सदन में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे, तो उस समय ही शिकायत क्यों नहीं की गई। भाजपा पार्षदों की मांग है कि लक्ष्मी कोरी की ओर से दिए गए शिकायती पत्र को निरस्त किया जाए। लक्ष्मी ने पांच पार्षदों पर लगाए थे आरोप वार्ड-10 की पार्षद लक्ष्मी कोरी ने 30 सितंबर को डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव से शिकायत की थी। इसमें उन्होंने भाजपा पार्षद आकर्ष बाजपेई, वंदना शर्मा, विद्या वर्मा, गोविंद शुक्ला और गोलू शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाए थे। लक्ष्मी कोरी के मुताबिक, 26 सितंबर को नगर निगम सदन की कार्यवाही के दौरान उन्हें जानकारी मिली थी कि कौशलपुरी मंडल मंत्री मनीष बाजपेयी और पार्षद पवन गुप्ता को महापौर के बेटे बंटी पांडेय और अनुराग पांडेय ने एक कमरे में बंद कर रखा है। उन्होंने इस पर विरोध जताया। उनका आरोप है कि दोपहर करीब 2:15 से 2:30 बजे के बीच जब उन्होंने महापौर को इस घटना की जानकारी देने की कोशिश की, तो उन्हें बागी पार्षद बताते हुए सदन से बाहर जाने को कहा गया। इसके बाद उनके साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई। लक्ष्मी कोरी ने खुद को दलित समुदाय से आने वाली और सुरक्षित सीट से दोबारा निर्वाचित पार्षद बताते हुए कहा था कि सदन में उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। उन्होंने पांचों पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। सीसीटीवी फुटेज भी देख चुकी है पुलिस इस मामले में पार्षद पवन गुप्ता की शिकायत पर पुलिस भी जांच कर रही है। बुधवार को स्वरूप नगर थाने की पुलिस नगर निगम के स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम पहुंची थी। वहां 26 सितंबर को हुई घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज देखे गए। फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक तरफ लक्ष्मी कोरी ने अपने साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा पार्षदों ने उनकी शिकायत को गलत बताते हुए उसे वापस लेने की मांग की है।
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