काशी विश्वनाथ के पास 105 क्विंटल विस्फोटक मिला:रिटायर्ड IPS बोले- इंटेलिजेंस की चूक, बड़ी लापरवाही हुई; हर एंगल से जांच जरूरी
वाराणसी में कोतवाली पुलिस ने शुक्रवार की रात गोला दीनानाथ इलाके में बड़ी छापेमारी की और 105 क्विंटल पटाखे का बारूद बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान जब्त किए। काशी विश्वनाथ धाम से महज एक किलोमीटर दूर पटाखा बनाने वाले बारूद और सामान के इतने बड़े भंडारण पर पुलिस की छापेमारी से हड़कंप मच गया। इस मकान के आस-पास के लोग डरे हैं। पुलिस ने इस मामले में साल 1996 से लिप्त राजेश कुमार गुप्ता उर्फ राजू को गिरफ्तार किया है। दैनिक भास्कर ने वाराणसी में इतनी बड़ी बरामदगी को लेकर रिटायर्ड IPS अधिकारियों से बात की। उनसे जाना कि रिहायशी और घनी आबादी के क्षेत्र में बारूद बनाने के सामान की इतनी बड़ी खेप मिलना कितना बड़ा नुकसान है? क्या इसका इस्तेमाल टेरर एक्टिविटी में हो सकता है? इस पर वाराणसी के पूर्व आईजी रहे रिटायर्ड डीजी सीबीसीआईडी और 1987 बैच के IPS जीएल मीणा और उत्तर प्रदेश ATS और STF के संस्थापक श्रीप्रकाश शुक्ला जैसे दुर्दांत अपराधी के एनकाउंटर में उसे चार गोलियां मारने वाले 1986 बैच के रिटायर्ड IPS राजेश पांडेय से बात की। रिटायर्ड IPS राजेश पांडेय ने कहा कि ये इंटेलिजेंस की चूक है। बड़ी लापरवाही हुई है। हर एंगल से जांच जरूरी है। अभी तक ऐसा कोई मॉड्यूल नहीं मिला। लेकिन इसका इस्तेमाल टेरर गतिविधियों में कोई भी जानकार कर सकता है। यह गंभीर विषय है। पढ़िए रिपोर्ट... पटाखे का बारूद खतरनाक, लेकिन आतंकी मॉड्यूल नहीं मिला रिटायर्ड IPS राजेश पांडेय ने बताया- वाराणसी में दशाश्वमेध और संकटमोचन मंदिर के पास हुए धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का नाम सामने आया था। उन धमाकों में अमोनियम नाइट्रेट और दूसरी चीजों का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने बताया कि NIA ने उत्तराखंड में भी एक मामले की जांच की थी। वहां चार युवकों पर माचिस की तीलियों में लगे बारूद को इकट्ठा कर धमाके की साजिश रचने का आरोप सामने आया था। हालांकि, पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बारूद से आतंकी गतिविधियां चलाने वाला कोई मॉड्यूल अब तक सामने नहीं आया है। दुरुपयोग करने का प्रयास कर सकते हैं राजेश पांडेय ने बताया कि पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में आग पकड़ने वाले रसायन होते हैं। इनका गलत इस्तेमाल किया जाए तो बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसी सामग्री को बड़ी मात्रा में खरीदने और जमा करने के लिए नियमों का पालन करना जरूरी है। पटाखे बनाने और उनका भंडारण करने के लिए भी प्रशासन की अनुमति लेनी होती है। इन्हें आबादी से दूर और सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गलत कामों के लिए बाजार में आसानी से मिलने वाली सामग्री का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए पुलिस और प्रशासन को ऐसे मामलों पर नजर रखनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का इस तरह दुरुपयोग आम बात नहीं है। गलत इस्तेमाल से बड़ा नुकसान हो सकता है राजेश पांडेय ने कहा कि पटाखे बनाने के लिए लाई गई सामग्री का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बड़ा नुकसान होने का खतरा रहता है। हालांकि, ऐसी सामग्री की खरीद और भंडारण पर नियम लागू होते हैं। पुलिस और प्रशासन के पास लाइसेंस लेकर काम करने वाले लोगों की जानकारी रहती है। उन्होंने बताया कि किसी घटना या बरामदगी के बाद जांच एजेंसियां इन रिकॉर्ड और कॉल डिटेल की मदद से जांच करती हैं। इसलिए नियमों के खिलाफ सामग्री जुटाने वालों के पकड़े जाने का खतरा रहता है। कुछ लोग धोखे से या गलत जानकारी देकर भी ऐसी सामग्री हासिल करने की कोशिश करते हैं, जो गैरकानूनी है। पुश्तैनी काम करने वाले ही बना रहे घर में पटाखे राजेश पांडेय ने बताया कि जब वह बाराबंकी में एडिशनल एसपी थे, तब पटाखों से हुए एक धमाके में 17 लोगों की मौत हो गई थी। रिटायरमेंट से पहले लखनऊ में भी ऐसा हादसा हुआ था। उन्होंने कहा कि दीपावली से करीब एक महीने पहले बड़े कारोबारी शिवाकाशी से पटाखे मंगाने लगते हैं, जबकि कुछ लोग पुश्तैनी तरीके से मिट्टी के अनार और देसी बम जैसे पटाखे बनाते हैं। वाराणसी के लालपुरा और दालमंडी जैसे इलाकों में भी ऐसे कारीगर हैं। उन्होंने कहा कि त्योहार से पहले पुलिस और प्रशासन को पटाखे बनाने वालों और उनके भंडारण की नियमित जांच करनी चाहिए। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में सतर्कता जरूरी है, ताकि अवैध भंडारण का पता समय रहते चल सके और हादसों को रोका जा सके। अब जानिए रिटायर्ड डीजी जीएल मीणा ने क्या कहा और घनी आबादी में भंडारण पर क्या बोले?… प्रयागराज में एसएसपी रहते पकड़ा था बारूद का भंडार रिटायर्ड आईपीएस जीएल मीणा ने बताया कि जब वह प्रयागराज में एसएसपी थे, तब बारा थाना क्षेत्र के शंकरगढ़ में पुलिस ने पहाड़ तोड़ने के काम आने वाले बारूद का बड़ा भंडार पकड़ा था। यह मात्रा लाइसेंस की तय सीमा से भी ज्यादा थी। उन्होंने कहा कि वाराणसी में भी इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री मिलने के बाद पुलिस को इसकी तह तक जाना चाहिए। यह पता लगाना जरूरी है कि सामग्री कहां से आई और उसे किस उद्देश्य से जमा किया गया था। विश्वनाथ धाम के करीब बरामदगी चिंताजनक जीएल मीणा ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में पटाखे बनाने की सामग्री मिलना गंभीर मामला है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। खासकर जब बरामदगी घनी आबादी वाले इलाके में और श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के करीब हुई हो। पुलिस को हर पहलू से जांच करनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही सामने आए तो समय रहते कार्रवाई की जा सके। भंडारण का मकसद पता कर सख्त कार्रवाई हो रिटायर्ड आईपीएस ने कहा कि जांच एजेंसियों को यह पता लगाना चाहिए कि घनी आबादी वाले इलाके में इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री कैसे जमा की गई। इसे रखने वाले व्यक्ति का उद्देश्य क्या था और सामग्री का इस्तेमाल किस काम के लिए किया जाना था, इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले में दोष सामने आने पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। ------------------------------ ये खबर भी पढ़िए- मां से आखिरी बार मिला 5 महीने का बेटा:वाराणसी में पिता संग बाइक से जा रही थी महिला, ट्रक में फंसकर घिसटती चली गई प्रयागराज-वाराणसी हाईवे पर शनिवार दोपहर ट्रक की टक्कर से एक महिला की मौत हो गई। वह करीब 3 बजे बाइक से पिता के साथ जा रही थी। तभी रखौना गांव के पास ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी। वह नीचे गिरने के बाद ट्रक में फंसकर 100 मीटर तक घिसटती चली गई। पढ़ें पूरी खबर...
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