कन्नौज में 200 जगह सजे मां दुर्गा के पंडाल:मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा

Oct 11, 2026 - 08:34
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कन्नौज में 200 जगह सजे मां दुर्गा के पंडाल:मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा
कन्नौज में शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को इत्रनगरी भक्तिमय हो गई। जिले में करीब 200 स्थानों पर मां दुर्गा के भव्य पंडाल सजाए गए हैं। सुबह से ही देवी मंदिरों और पूजा पंडालों में घंटे-घड़ियाल गूंजने लगे। कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक नवरात्र को लेकर उत्साह दिखाई दिया। प्रमुख मंदिरों में सुबह से पहुंचने लगे श्रद्धालु नवरात्र के पहले दिन शहर के सिद्धपीठ माता फूलमती देवी मंदिर, सिंहवाहिनी मंदिर, काली मंदिर और क्षेमकली मंदिर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई। श्रद्धालुओं ने नारियल, चुनरी, फूल और प्रसाद चढ़ाकर माता रानी का आशीर्वाद लिया। तिर्वा स्थित अन्नपूर्णा देवी मंदिर और छिबरामऊ के कालिका देवी मंदिर में भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। पंडालों में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन की तैयारी शहर के विभिन्न मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में मां दुर्गा के पंडाल सजाए गए हैं। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। आयोजकों की ओर से नौ दिनों तक धार्मिक कार्यक्रम कराने की तैयारियां की गई हैं। कई स्थानों पर भागवत कथा, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक आयोजन होंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना में शामिल होंगे। सात बहनों के मंदिरों से जुड़ी है कन्नौज की मान्यता सिद्धपीठ माता फूलमती देवी मंदिर के पुजारी शिखर मिश्रा के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि त्रेतायुग में कन्नौज के महान सम्राट वेणु चक्र की सात बेटियां थीं। उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें सिद्धपीठ के रूप में पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था। मान्यता के अनुसार, इन सातों बहनों के मंदिर कन्नौज नगर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं। माता फूलमती देवी को सातों बहनों में सबसे बड़ी माना जाता है। माता के चरणों के जल से नेत्र विकार दूर होने की मान्यता पुजारी शिखर मिश्रा ने बताया कि माता फूलमती देवी के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। मान्यता है कि माता के चरणों के जल से नेत्र संबंधी विकार दूर होते हैं और सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी विश्वास के चलते नवरात्र में दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नौ दिनों तक मंदिरों और पंडालों में होंगे धार्मिक आयोजन नवरात्र के दौरान जिले के देवी मंदिरों और पूजा पंडालों में प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा कर सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करेंगे। भजन-कीर्तन और कथा आयोजनों के बीच पूरे जिले में नौ दिनों तक भक्तिमय माहौल रहने की उम्मीद है।

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