कोलकाता की मिट्टी से बन रहीं दुर्गा प्रतिमाएं:6 महीने से चल रहा काम, 10 कारीगर दे रहे अंतिम रूप; 5 हजार से 65 हजार तक कीमत
प्रतापगढ़ में इस बार मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार करने के लिए खास तौर पर कोलकाता की मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। शिल्पकारों के अनुसार कोलकाता की मिट्टी से बनी प्रतिमाएं अधिक टिकाऊ होती हैं और लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं। प्रतिमाओं के चेहरे समेत अन्य हिस्सों में भी इसी मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। शारदीय नवरात्र की तैयारियां तेज हो गई हैं। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्र को लेकर जिले के विभिन्न इलाकों में दुर्गा पूजा पंडाल सजाए जा रहे हैं। वहीं मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में कोलकाता से आए शिल्पकार जुटे हुए हैं। खास बात यह है कि इस बार मां दुर्गा की प्रतिमाओं को पारंपरिक आभूषणों के साथ आकर्षक लहंगे से भी सजाया जा रहा है। भक्त अपनी पसंद के लहंगे और गहने शिल्पकारों को उपलब्ध करा रहे हैं, जिन्हें प्रतिमा पर सजाया जा रहा है। छह महीने से चल रही प्रतिमा निर्माण की तैयारी शिल्पकारों ने बताया कि प्रतिमाओं को तैयार करने का काम करीब छह महीने पहले शुरू कर दिया गया था। कोलकाता से आए करीब 10 कारीगर प्रतापगढ़ में रहकर मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। प्रतिमाओं की मांग और आकार के अनुसार उनकी कीमत तय की गई है। इस बार प्रतिमाएं 5 हजार रुपये से लेकर 65 हजार रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं। नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ने के साथ ही पूजा समितियां पंडालों को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं। अगले दो दिनों में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पंडालों और प्रतिमाओं की सजावट पूरी होने की उम्मीद है।
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