क्षत्रिय किसी दल से चुनाव लड़ेगा, निषाद वोट नहीं देंगे:गोरखपुर में बोले सपा सांसद रामभुआल; निषाद महापंचायत में भाग लेने आए थे
गोरखपुर में पत्रकारवार्ता के दौरान 4 अक्टूबर को हुए थप्पड़ कांड के बाद राजनीति जारी है। इस कांड के आरोपी अंशुमान सिंह के पक्ष में बांसगांव में क्षत्रियों ने महापंचायत लगाई थी। उसके जवाब में महानगर के रुस्तमपुर क्षेत्र में स्थित निषादराज मंदिर परिसर में शुक्रवार को निषाद समाज की महापंचायत हुई। इसमें कई स्थानीय नेताओं के साथ सुल्तानपुर से सपा सांसद रामभुआल निषाद भी शामिल हुए। रामभुआल ने कहा कि थप्पड़ कांड के आरोपी के बिरादरी (क्षत्रिय) का कोई प्रत्याशी कहीं से, किसी भी दल से चुनाव लड़ेगा तो उसे निषाद समाज वोट नहीं देगा। वह सपा से लड़ेगा, तब भी नहीं। रामभुआल ने कहा कि यहां पर सभी निषाद एकजुट हुए हैं। सभी ने एकजुटता का परिचय दिया है। निषादों के सम्मान में मैं यहां आया हूं। सांसद ने कहा कि हमारा समाज किसी पर ज्यादती नहीं करता है लेकिन यदि कोई हमें चैलेंज करेगा तो उनका चैलेंज स्वीकार करेंगे। समाज के माध्यम से सबका जवाब दिया जाएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिस समाज के लोगों ने नगीना प्रसाद साहनी को थप्पड़ मारा है, उस समाज का कोई भी लड़ेगा तो उसे वोट नहीं दिया जाएगा। प्रदेश कैबिनेट की ओर से जेवर एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर रखने के फैसले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह चापलूसी करने जैसा है। प्रदेश में मंत्री रह चुके हैं रामभुआल निषाद रामभुआल निषाद 2007 तक अस्तित्व में रही कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे और बसपा सरकार में मंत्री रहे। 2002 में बसपा के टिकट पर ही उन्होंने कौड़ीराम से जीत हासिल की थी। 2005 में वह सपा में चले गए थे। जिससे दल-बदल कानून में उनकी सदस्यता खत्म हो गई थी। 2006 में उपचुनाव हुआ तो फिर रामभुआल जीत गए। इस बार वह सपा के प्रत्याशी थे। लेकिन 2007 में बसपा के अंबिका सिंह से चुनाव हार गए।
रामभुआल ने अपना पहला चुनाव 1996 में चिल्लूपार विधानसभा से निर्दल लड़ा था। लेकिन हार गए थे। 2006 के बाद उन्होंने कई बार प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। 2012 में वह बसपा के टिकट पर गोरखपुर ग्रामीण से चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2017 में चिल्लूपार व 2022 में रुद्रपुर से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली। 2024 के चुनाव में सपा प्रमुख ने अचानक उन्हें सुल्तानपुर से मेनका गांधी के खिलाफ टिकट दिया। सुल्तानपुर जाकर उन्होंने चुनाव जीत लिया। मंत्री रहते हुए उनका नाम कटका कांड के बाद चर्चा में आया था। इस घटना में निषाद व क्षत्रिय के बीच संघर्ष हुआ था।
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