1920 में बना AMU छात्रसंघ समेटे है राजनीतिक विरासत:सिंडन्स डिबेटिंग क्लब से शुरू हुआ यूनियन हॉल का सफर, गांधी से लेकर आरिफ मोहम्मद खान तक जुड़े बड़े नाम

Oct 09, 2026 - 17:59
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1920 में बना AMU छात्रसंघ समेटे है राजनीतिक विरासत:सिंडन्स डिबेटिंग क्लब से शुरू हुआ यूनियन हॉल का सफर, गांधी से लेकर आरिफ मोहम्मद खान तक जुड़े बड़े नाम
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) का छात्रसंघ सिर्फ चुनाव और पदाधिकारियों तक सीमित नहीं है। यह विश्वविद्यालय की राजनीतिक, वैचारिक और ऐतिहासिक विरासत का भी अहम हिस्सा रहा है। इसी छात्रसंघ से जुड़े कई चेहरे आगे चलकर देश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में बड़े मुकाम तक पहुंचे। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व राज्यसभा सदस्य मोहम्मद अदीब, आजम खां और विधायक नफीस अहमद जैसे नाम इसकी पहचान का हिस्सा हैं। करीब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद अब छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया फिर शुरू होने जा रही है। 19 दिन तक चले छात्र आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 5 नवंबर को मतदान और मतगणना कराने का कार्यक्रम घोषित किया है। सिंडन्स डिबेटिंग क्लब से यूनियन हॉल तक का सफर एएमयू छात्रसंघ के इतिहास की जड़ें विश्वविद्यालय के पुराने शैक्षणिक और वाद-विवाद के माहौल से जुड़ी हैं। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरण के मुताबिक, सर सैयद अहमद खान ने कॉलेज की स्थापना के बाद वर्ष 1905 में सिंडन्स डिबेटिंग क्लब के रूप में इसकी नींव रखी थी। बाद में 1920 में कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के साथ इसे छात्रसंघ के यूनियन हॉल के रूप में विकसित किया गया। आज यूनियन हॉल छात्रसंघ की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। यहां से छात्रसंघ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और अन्य निर्वाचित पदाधिकारियों के कार्यालय संचालित होते हैं। छात्र राजनीति, विचार-विमर्श और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर इस परिसर की ऐतिहासिक भूमिका रही है। 1920-21 में पहला अध्यक्ष, 2018 में आखिरी चुनाव छात्रसंघ की शुरुआत वर्ष 1920-21 में मानी जाती है। केएम खुदा बक्श पहले अध्यक्ष बने, जबकि वर्ष 1921-22 में सैयद नूरुल्लाह ने अध्यक्ष पद संभाला। इसके बाद लंबे समय तक छात्रसंघ चुनाव विश्वविद्यालय की परंपरा का हिस्सा बने रहे, हालांकि कई अवधियों में चुनाव नहीं हो सके। वर्ष 2018 में हुए चुनाव में मोहम्मद सलमान इम्तियाज अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 2019 से चुनाव का सिलसिला रुक गया। वर्ष 2023 में भी चुनाव की मांग को लेकर छात्रों ने बाब-ए-सैयद पर 50 दिन तक धरना दिया था। नियमित कुलपति की नियुक्ति के बाद चुनाव कराने के आश्वासन पर आंदोलन समाप्त हुआ, लेकिन चुनाव नहीं हो सका। अब 2026-27 के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद छात्रसंघ की निर्वाचित व्यवस्था दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है। 106 साल के इतिहास में कई बार रुका चुनाव छात्रसंघ का चुनावी इतिहास लगातार एक जैसा नहीं रहा। इतिहास पर ध्यान दें तो वर्ष 1965-66, 1973-74, 1988-89, 1996, 2000 से 2003, 2007 से 2010, 2013-14, 2015-16 और 2019 से 2026 के दौरान चुनाव नहीं हो सके। इन अवधियों को मिलाकर विश्वविद्यालय के 106 साल के इतिहास में कई बार चुनाव नहीं होने का उल्लेख किया गया है। छात्र नेताओं की मांग रही है कि चुनाव कराने के लिए कार्यकाल की लंबाई को बाधा नहीं बनना चाहिए। उनका तर्क है कि छात्रसंघ का कार्यकाल भले ही चार-पांच महीने का हो, लेकिन छात्रों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलना चाहिए। छात्रसंघ से संसद और राजनीति तक पहुंचे चेहरे एएमयू छात्रसंघ ने कई ऐसे व्यक्तित्व दिए, जिन्होंने विश्वविद्यालय से बाहर भी अपनी पहचान बनाई। आरिफ मोहम्मद खान छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं और आगे चलकर केरल के राज्यपाल बने। पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद अदीब राज्यसभा के सदस्य रहे, जबकि आजम खां प्रदेश में मंत्री व नफीस अहमद विधायक बने। पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष माजिन जैदी के अनुसार, छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्षों की सूची में सैयद मजीदुद्दीन अहमद, सुल्तान मोहम्मद खान, इब्ने हसन जुबैरी, आले अहमद सरूर, मोहम्मद अदीब, अब्दुल हफीज गांधी, अबू अफ्फान फारूकी, फैजुल हसन, मशकूर उस्मानी और मोहम्मद सलमान इम्तियाज सहित अनेक नाम शामिल हैं। इस सूची में कुछ ऐसे पदाधिकारी भी रहे, जिन्होंने दो बार अध्यक्ष या कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई। यूनियन हॉल की विरासत, चुनाव से फिर जागेंगी गतिविधियां एएमयू का यूनियन हॉल केवल एक कार्यालय नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की पहचान भी है। यहां से छात्र हितों से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं और छात्रसंघ ने परिसर में संवाद तथा नेतृत्व तैयार करने में भूमिका निभाई है। लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण यह व्यवस्था निर्वाचित प्रतिनिधियों से वंचित रही। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने पर यह तय होगा कि लंबे अंतराल के बाद छात्र किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं और यूनियन हॉल में फिर से निर्वाचित कैबिनेट की सक्रियता किस तरह लौटती है। महात्मा गांधी से दलाई लामा तक, AMU छात्रसंघ के आजीवन सदस्य रहे दिग्गज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ की आजीवन सदस्यता पाने वाली हस्तियों में देश-विदेश के कई बड़े नाम शामिल हैं। महात्मा गांधी वर्ष 1920 में यूनियन के पहले आजीवन सदस्य बने थे। इसके बाद मुस्लिम कवि एवं दार्शनिक मोहम्मद इकबाल (1929), मो.अली जिन्ना, स्वतंत्रता सेनानी खान अब्दुल गफ्फार खान (1934), भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (1948) और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1951) को भी इस सूची में जगह मिली। इस सूची में सऊदी अरब के राजा सऊद बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति अनवर सादात, अफगानिस्तान के राजा मोहम्मद ज़ाहिर शाह, मिस्र के राष्ट्रपति गामाल अब्देल नासिर, ईरान की महारानी सुरैया असफंदियारी-बख्तियारी और ईरानी राजनीतिज्ञ असगर हिकमत जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी शामिल हैं। भारत के पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरि (1958), पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (1959), प्रख्यात इस्लामी विद्वान अबुल हसन अली हसानी नदवी (1959) और विज्ञान के नोबेल पुरस्कार विजेता सर अलेक्जेंडर आर. टॉड (1960) का नाम भी इस सूची में दर्ज है। इसके अलावा समाजसेविका मदर टेरेसा (1983), तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा (1998), नागरिक अधिकार कार्यकर्ता एवं पत्रकार तीस्ता सीतलवाड़ (2018), वैज्ञानिक सी.वी. रमन, स्वतंत्रता सेनानी एवं कवयित्री सरोजिनी नायडू, लेखक ई.एम. फोर्स्टर, राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और कई अन्य प्रमुख हस्तियों के नाम भी आजीवन सदस्यों की सूची में शामिल हैं।

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