कतरनों से कारोबार और रोजगार की नई कहानी:देवरिया की अमृता ने खड़ा किया 35 लाख का उद्यम, 26 महिलाओं को मिला काम

Oct 08, 2026 - 10:13
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कतरनों से कारोबार और रोजगार की नई कहानी:देवरिया की अमृता ने खड़ा किया 35 लाख का उद्यम, 26 महिलाओं को मिला काम
देवरिया में टेलरिंग दुकानों और बुटीक से निकलने वाली कपड़ों की कतरनें अक्सर कूड़े में फेंक दी जाती हैं। देवरिया की अमृता तिवारी ने 2021 में 'ख्वाहिश क्रिएशन' शुरू कर इन्हीं कतरनों से महिलाओं के लिए रोजगार और पर्यावरण बचाने का जरिया बनाया है। उत्पादों की मांग बढ़ने पर अमृता जागृति एंटरप्राइज सेंटर-पूर्वांचल के इनक्यूबेशन प्रोग्राम से जुड़ीं। मार्गदर्शन से उनके उद्यम को बढ़ने में मदद मिली। उनकी टीम अब टेलरिंग दुकानों, बुटीक और घरों से कतरनें इकट्ठा करती है। इन कतरनों को रंग, बनावट और क्वालिटी के हिसाब से अलग किया जाता है। इनसे महिलाओं के सूट, कुर्ती, बच्चों के कपड़े, को-ऑर्ड सेट, बैग, कुशन कवर और होम डेकोर उत्पाद बनते हैं। इनकी बिक्री इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, रिटेल स्टोर और प्रदर्शनियों के जरिए देश के कई शहरों में होती है। 300 किलो कपड़ों की कतरनों का इस्तेमाल अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर पांच हजार उत्पादों का रहा, जिसमें 300 किलो कपड़ों की कतरनों का इस्तेमाल हुआ। अमृता हर महीने 400-500 किलो टेक्सटाइल वेस्ट का उपयोग करती हैं। ‘ख्वाहिश क्रिएशन’ की टीम हर महीने करीब 400 से 500 किलो टेक्सटाइल वेस्ट का पुन: उपयोग कर रही है। वर्ष 2022 में काम शुरू होने के बाद अब तक करीब 30 टन कपड़ा कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला जा चुका है। टेलरिंग दुकानों, बुटीक और अन्य प्रतिष्ठानों से मिलने वाली कतरनों को पहले अलग-अलग किया जाता है। इसके बाद उनसे कपड़े, बैग, कुशन कवर और सजावटी उत्पाद तैयार होते हैं। सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा इससे कपड़ा कचरा सीधे कूड़े में जाने से बच रहा है और उसे दोबारा उपयोग में लाकर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिल रहा है। अमृता तिवारी की इस पहल से अब 26 महिलाओं सहित करीब 30 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। आसपास रोजगार का अवसर कपड़ों की कतरनों को एकत्र करने से लेकर उनकी छंटाई, डिजाइन तैयार करने और उत्पाद बनाने तक अलग-अलग स्तर पर लोगों को काम मिल रहा है। खास बात यह है कि इस काम से महिलाओं को घर के आसपास रोजगार का अवसर भी मिला है। कारोबार बढ़ने के साथ काम का दायरा भी बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में ‘ख्वाहिश क्रिएशन’ का कारोबार करीब 35 लाख रुपये तक पहुंच गया। अमृता तिवारी के अनुसार, उनके उत्पादों में सबसे दिलचस्प प्रतिक्रिया बच्चों के कपड़ों को लेकर मिलती है। अलग-अलग कपड़ों की कतरनों से तैयार पैचवर्क डिजाइन आकर्षक होने के कारण ग्राहक इन्हें सामान्य वेस्ट फैब्रिक से बना उत्पाद नहीं मानते। कपड़ा कचरा कम करने में भी मदद कई बार लोग इन्हें विशेष डिजाइनर फैब्रिक से तैयार उत्पाद समझ लेते हैं। यही वजह है कि टेक्सटाइल वेस्ट से बने उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। कतरनों का दोबारा इस्तेमाल होने से जहां नए उत्पाद तैयार हो रहे हैं, वहीं कपड़ा कचरा कम करने में भी मदद मिल रही है। टेक्सटाइल वेस्ट के अगले उपयोग पर भी काम ख्वाहिश क्रिएशन’ की टीम अब टेक्सटाइल वेस्ट के अगले उपयोग पर भी काम कर रही है। टीम कपड़ों की कतरनों से टिकाऊ निर्माण सामग्री विकसित करने की संभावनाएं तलाश रही है। यदि यह प्रयोग सफल होता है तो कपड़ा कचरे के निस्तारण के लिए एक और विकल्प तैयार हो सकता है। अभी बड़ी मात्रा में कपड़ा कचरा उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है। ऐसे में कतरनों को निर्माण सामग्री जैसे दूसरे उपयोग में लाने की तकनीक विकसित होने से पर्यावरणीय दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। टीम इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। पांच हजार उत्पादों का मिला सबसे बड़ा ऑर्डर ‘ख्वाहिश क्रिएशन’ को अब तक पांच हजार उत्पादों का सबसे बड़ा ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर को पूरा करने में करीब 300 किलो कपड़ों की कतरनों का इस्तेमाल किया गया। अलग-अलग रंग, डिजाइन और बनावट वाली कतरनों को मिलाकर उत्पाद तैयार किए गए। सामान्य नजर से पहचानना मुश्किल तैयार सामान की खासियत यह है कि सामान्य नजर से यह पहचानना मुश्किल होता है कि इसमें इस्तेमाल कपड़ा पहले किसी दूसरे उत्पाद की बची हुई कतरन था। अमृता की टीम के उत्पाद अब इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, रिटेल स्टोर और विभिन्न प्रदर्शनियों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।

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