लखीमपुर-खीरी में 3 समितियों के खाद बिक्री लाइसेंस सस्पेंड:हसनापुर में 70 बोरी खाद का अंतर, चकलाखीपुर-बम्भौरी में भी अनियमितताएं

Oct 06, 2026 - 11:04
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लखीमपुर-खीरी में 3 समितियों के खाद बिक्री लाइसेंस सस्पेंड:हसनापुर में 70 बोरी खाद का अंतर, चकलाखीपुर-बम्भौरी में भी अनियमितताएं
लखीमपुर खीरी की तहसील धौरहरा में उर्वरक स्टॉक में अनियमितता के मामले में कृषि विभाग ने धौरहरा विकासखंड की तीन सहकारी समितियों के खिलाफ कार्रवाई की है। बी पैक्स हसनापुर, बी पैक्स चकलाखीपुर और एम पैक्स बम्भौरी के उर्वरक बिक्री लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। विभागीय जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद तीनों समितियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी समुचित जवाब नहीं दिया गया। अब कृषि विभाग तीनों समितियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। इसके लिए संबंधित पत्रावली जिलाधिकारी के समक्ष भेजी जाएगी। मामले की शुरुआत जिलाधिकारी खीरी के आदेश संख्या 1543, दिनांक छह अगस्त 2026 के अनुपालन में हुई संयुक्त जांच से हुई। सात अगस्त को जिला कृषि अधिकारी और सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता की संयुक्त टीम ने धौरहरा क्षेत्र की उर्वरक समितियों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान समितियों में उपलब्ध उर्वरक स्टॉक, पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और अभिलेखों का मिलान किया गया। पीओएस स्टॉक और मौके के स्टॉक में मिला अंतर जांच के दौरान बी पैक्स हसनापुर के उर्वरक परिसर में पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध भौतिक स्टॉक में अंतर पाया गया। विभाग के मुताबिक, 70 बोरी एनपीके उर्वरक का अंतर सामने आया। स्टॉक में इस अंतर को लेकर समिति से जवाब मांगा गया। जिला कृषि अधिकारी कार्यालय की ओर से सात अगस्त को पत्रांक 1553 के माध्यम से हसनापुर समिति को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में तीन दिन के भीतर आवश्यक अभिलेखों और साक्ष्यों के साथ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। विभागीय अभिलेखों के अनुसार, निर्धारित अवधि में समिति की ओर से कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। अंतिम अवसर के बाद भी नहीं आया जवाब समिति की ओर से जवाब नहीं मिलने पर कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की। जिला कृषि अधिकारी के पत्रांक 1791, दिनांक नौ सितंबर 2026 के माध्यम से सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, खीरी को अनुस्मारक भेजा गया। इसमें समिति से सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था। विभागीय आदेश के मुताबिक, यह समिति को जवाब देने का अंतिम अवसर था। इसके बावजूद निर्धारित अवधि में भी कोई स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया। विभाग का कहना है कि नोटिस और अनुस्मारक के बावजूद जवाब नहीं आने से समिति की ओर से उर्वरक स्टॉक में पाई गई विसंगति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हसनापुर का खाद बिक्री लाइसेंस निलंबित स्पष्टीकरण नहीं मिलने के बाद जिला कृषि अधिकारी ने आदेश संख्या 1829, दिनांक 15 सितंबर 2026 के माध्यम से बी पैक्स हसनापुर का फुटकर उर्वरक प्राधिकार पत्र संख्या DAO/LMK/624 तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभागीय आदेश में कहा गया है कि संबंधित संस्था द्वारा उर्वरक नियंत्रण से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को समिति परिसर में उपलब्ध उर्वरक स्टॉक की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। चकलाखीपुर और बम्भौरी भी कार्रवाई की जद में इसी संयुक्त निरीक्षण के दौरान बी पैक्स चकलाखीपुर और एम पैक्स बम्भौरी में भी उर्वरक से संबंधित अनियमितताएं सामने आई थीं। दोनों समितियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। विभाग के अनुसार, निर्धारित समय में तीनों समितियों की ओर से समुचित जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद विभाग ने तीनों समितियों के उर्वरक बिक्री लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की है। अब प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। उर्वरक आपूर्ति पर भी रोक के निर्देश हसनापुर समिति के मामले में विभागीय आदेश में संबंधित अधिकारियों को समिति परिसर में उपलब्ध उर्वरक स्टॉक की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही इफको और कृभको के क्षेत्रीय प्रबंधकों को समिति को उर्वरक की आपूर्ति नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि स्टॉक में अंतर पाए जाने के बाद समिति को आगे उर्वरक की आपूर्ति जारी रखने से पहले पूरे मामले की जांच और अभिलेखों का सत्यापन किया जाना है। एफआईआर के लिए जिलाधिकारी से मांगी जाएगी अनुमति जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह के अनुसार, तीनों समितियों के खाद बिक्री लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। एफआईआर दर्ज कराने के लिए पत्रावली जिलाधिकारी के समक्ष भेजी जाएगी। जिलाधिकारी से अनुमति मिलने के बाद संबंधित समितियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कृषि विभाग की कार्रवाई के बाद तीनों समितियों के संचालन और वहां उपलब्ध उर्वरक स्टॉक की स्थिति पर विभाग की नजर है। जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि स्टॉक में अंतर और अन्य अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

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