लखनऊ लेटे हुए हनुमान मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचा पानी:हनुमंत धाम हुआ जल मग्न , शनिदेव मंदिर में पानी-पानी , पुजारी बोले - गोमती मां नाराज विकराल रूप लिया

Oct 04, 2026 - 16:40
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लखनऊ लेटे हुए हनुमान मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचा पानी:हनुमंत धाम हुआ जल मग्न , शनिदेव मंदिर में पानी-पानी , पुजारी बोले - गोमती मां नाराज विकराल रूप लिया
लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। करीब 40 हजार से ज्यादा घरों में पानी घुस गया है। 3 लाख लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। बढ़ते हुए जल स्तर का प्रभाव गोमती तट के आसपास बसे मंदिरों पर भी हो रहा है। पातालपुरी लेटे हनुमान मंदिर के गर्व गृह तक पानी पहुंच चुका है , हनुमत धाम का गोमती की तरफ वाला इलाका पूरी तरीके से जलमग्न है पीछे का गेट बंद कर दिया गया है। शनि देव मंदिर का भी नीचे का हिस्सा पानी में डूबा हुआ है। गर्भगृह में डेढ़ मीटर तक पानी पहुंचा मंदिर के पुजारी विनोद तांगड़ी ने बताया कि पानी मां गोमती का तेजी से बढ़ रहा है। गोमती श्री हनुमान जी के चरणों तक पहुँच चुकी हैं और शीघ्र स्नान कराने वाली हैं। गर्व गृह में 1.5 मीटर पानी भरा हुआ। स्थिति भयावह है लगभग 20 साल बाद गर्व गृह में पानी प्रवेश किया है। 2006 के बाद यह स्थिति आई है, जब इतना जलस्तर बढ़ा है। ‘राम कथा का पंडाल पानी में डूबा’ मानवीय दृष्टिकोण से यह बड़ा दुखद है, क्योंकि लखनऊ का 20 से 25% आबादी प्रभावित हो गई है, जो डाउनस्ट्रीम में रह रही है। यहाँ पर फैजुल्लागंज है, घैला है ये सब इलाके पूरी तरह से डूब रहे हैं। और सबसे आश्चर्य की बात है कि निरंतर, लगातार जलस्तर बढ़ ही रहा है, जबकि आज बारिश को रुके हुए लगभग-लगभग 6 दिन हो चुके हैं। परंतु 6 दिन से लगातार माता जी आगे बढ़ती आ रही हैं। मंदिर में रामकथा चल रही, जब रामकथा का पंडाल सज रहा था, तो पानी पंडाल से करीबन 15 फीट दूर था और आज पंडाल के अंदर माता प्रवेश कर चुकी हैं,तो स्थिति तो भयावह है। नदियों के अनादर से आया प्रलय यह विनाशलीला कहीं-न-कहीं हम सबके कारण ही है जो नदियों का अनादर किया है हमने। हम लोगों ने जो प्रकृति और संसाधनों का दोहन किया है, प्रकृति से संबंधित प्रेम नहीं रखा, पेड़ काटते चले गए और असंतुलन हो गया। सरकारी स्तर पर इस पर ध्यान देना चाहिए। लगभग 32 नाले हैं जो माँ गोमती में सीधे गिर रहे हैं । तो माता भी अपने आप को स्वच्छ करने के लिए आज विशाल जल प्रवाह लेके आई हैं कि जिससे जितनी भी गंदगी है सब भाग जाए। दुनिया कि गंदगी, प्लास्टिक , गंदगी सब नदी में मिलेगा । जो गोमती का अपमान किया है उसका दंश तो हम ही को झेलना पड़ेगा। पानी बढ़ने पर गर्व गृह हो सकता है बंद उन्होंने बताया कि मंदिर गर्भगृह में पानी आ चुका है। परंतु पूजन नियमित अभी मंदिर गर्भगृह में ही चल रही है क्योंकि घुटनों के नीचे पानी है। ट्रस्ट की मीटिंग हुई थी जिसमें यह निर्णय हुआ है कि जब जलस्तर बढ़ेगा बहुत अधिक, तो मंदिर के बाहर से हनुमान जी की पूजन-अर्चन की जाएगी। अगर पानी ज्यादा बढ़ा तो हनुमान जी के ऊपर लाल चादर ओढ़ा दो जाएगी और दूर से भोग-प्रसाद, आरती अर्पण किया जाएगा।

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