लखनऊ में 68500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन:भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का आवास घेरा, नियुक्ति न मिलने पर भड़के , अधिकारियों पर गुमराह करने का आरोप लगाया

Oct 09, 2026 - 11:55
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लखनऊ में 68500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन:भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का आवास घेरा, नियुक्ति न मिलने पर भड़के , अधिकारियों पर गुमराह करने का आरोप लगाया
लखनऊ में शुक्रवार को 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरीन के आवास का घेराव किया। अभ्यर्थी सड़क पर लेट गए। उन्होंने सिर पर 'आरक्षण घोटाला' लिखी टोपी पहनकर सीटी बजाई और नारे लगाए। प्रदर्शन करीब 35 मिनट तक चला। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जबरन हटाने और बदसलूकी करने का आरोप लगाया। अभ्यर्थियों की मांग है कि 2018 की भर्ती में उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाए। साथ ही 5% छूट के आधार पर संशोधित चयन सूची जारी की जाए। उनका कहना है कि इस बार नियुक्ति मिलेगी या अर्थी उठेगी। ‘ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है’ प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने 'ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है' और 'पिछड़ा आयोग ने माना है-आरक्षण घोटाला है' जैसे नारे लगाए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। इसके बाद दोनों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। प्रदर्शन में दिव्यांग अभ्यर्थी भी शामिल थे। 2018 में निकली थी भर्ती प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, वर्ष 2018 में 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती निकाली गई थी। इसमें दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 5% की छूट का प्रावधान था। आरोप है कि इन चारों श्रेणियों के अभ्यर्थियों को इसका लाभ नहीं मिला और सामान्य अभ्यर्थियों के साथ ही परिणाम जारी कर दिया गया। 8 साल से नौकरी का इंतजार प्रदर्शन कर रहे आशुतोष वर्मा ने कहा कि पिछले 8 साल से नौकरी के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में बड़े स्तर पर आरक्षण में गड़बड़ी हुई है। राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी आरक्षण में गड़बड़ी की बात मानते हुए नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि आयोग के आदेशों का पालन किया जाए। वर्ष 2018 में भर्ती निकली थी और तभी उन्होंने आवेदन किया था। इसके बाद से नौकरी की उम्मीद में 8 साल से लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें नौकरी नहीं मिली है। जब तक नौकरी नहीं मिलती संघर्ष चलता रहेगा।

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