लखनऊ में एम्बुलेंस ड्राइवरों ने भाजपा दफ्तर घेरा:प्रदर्शनकारी बोले- 5 साल से नौकरी के लिए भटक रहे हैं , परिवार भुखमरी के कगार पर
लखनऊ में रविवार को भाजपा दफ्तर के बाहर डायल-108 और डायल-102 के एंबुलेंस ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया। नारा लगाया 'कोरोनाकाल में हमें हीरो कहा, अब हम जीरो हो गए'। पिछले कई दिनों से लगातार इको गार्डन में आंदोलन चल रहा है। इस दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, ओमप्रकाश राजभर समेत कई मंत्रियों के आवास का घेराव भी कर चुके हैं ‘5 साल से नौकरी के लिए भटक रहे हैं’ प्रदर्शनकारियों का कहना था कि GVKEMRI कंपनी ने हमें कोरोनाकाल के तुरंत बाद बाद 2021 में नौकरी से निकाल दिया। तब से हम बेरोजगार हैं। प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे एंबुलेंस ड्राइवरों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। हिरासत में लिए जाने से पहले प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय में लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात करके सरकार से पैरवी करने कि मांग किया। ‘12 कर्मचारियों की जान गई’ एंबुलेस ड्राइवरों ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान दिन-रात सेवाएं दीं। 12 कर्मचारियों ने अपनी जान भी गंवाई, पीड़ित परिवारों को न मुआवजा मिला और ना ही नौकरी। लेकिन काम लेने के बाद उन्हें नौकरी से निकालकर बेरोजगार कर दिया गया। 5 साल से रोजगार के लिए भटक रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने निजी कंपनी पर नौकरी से निकालने, शारीरिक, मानसिक शोषण करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए। 50 हजार रुपए तक घूस लेने का आरोप बस्ती से आए सुशील पांडे ने बताया कि एंबुलेंस कंपनी भर्ती के नाम पर 25 हजार और 50 हजार रुपए वसूलती है। ड्राइवर से 25 हजार और टेक्नीशियन से 50 हजार रुपए लेती है। कंपनी ने विरोध करने वाले करीब हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया। 2021 में विरोध करने वाले 3 हजार कर्मचारियों को निकाला गया। अब तक कंपनी करीब 9 हजार लोगों को निकाल चुकी है।
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