लखनऊ में जैन मुनि विहसंत सागर महाराज का प्रवचन:मुनियों की कठिन चर्या और त्याग पर चर्चा, 5 अक्टूबर को होगा प्रवचन
लखनऊ में वर्षायोग के तहत रविवार को जैन मुनि उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर महाराज ने विहार करते हुए चौक चौराहा पहुंचकर धर्मसभा को संबोधित किया। मुनिराज के पहुंचते ही शोभायात्रा धर्मसभा में बदल गई। कार्यक्रम श्री अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद की ओर से किया गया। धर्मसभा में उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ने कहा कि जैन मुनि की चर्या बेहद कठिन होती है। मुनिराज दिन में केवल एक बार आहार ग्रहण करते हैं। वे किसी भी वस्तु का संग्रह या धारण नहीं करते। उन्होंने कहा कि दिगंबर मुनि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हीटर और कूलर जैसी सुविधाओं का उपयोग नहीं करते। गद्दे, रजाई और बिस्तर का भी इस्तेमाल नहीं करते। मुनिराज किसी वाहन का उपयोग भी नहीं करते। उनके जीवन में 81 प्रकार के त्याग और कठोर संयम का पालन होता है। संयम, सदाचार और समर्पण अपनाएं मुनिराज ने कहा कि आज जरूरत है कि हम संतों की तपस्या और त्याग से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में संयम, सदाचार और समर्पण अपनाएं। साथ ही देशहित में काम करते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाएं। इस मौके पर कैलाश चंद जैन ने भी जैन मुनियों की कठिन चर्या, तपस्या और त्यागमय जीवन पर प्रकाश डाला। मंच संचालन पियूष जैन ने किया। मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि 5 अक्टूबर को पूज्य गुरुदेव के प्रवचन चौक क्षेत्र में होंगे। इसके बाद दिगंबर जैन मुनिराज का विहार भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि 11 से 16 अक्टूबर तक होने वाली पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाने वाले परिवारों के लिए गोद भराई और सभी पात्रों के सम्मान समारोह का आयोजन भी किया जाएगा। सभासद समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे चौक के सभासद अनुराग मिश्रा ने कार्यक्रम में पहुंचकर मुनिराज का आशीर्वाद लिया। विभिन्न सामाजिक और चिकित्सा संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी गुरुदेव के दर्शन किए। वीर कुमार जैन, रितेश जैन, अशोक जैन, अमित जैन, सम्यक जैन, चंद्र प्रकाश जैन, अखिलेश जैन समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
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