लखनऊ में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन:पुंडरीक गोस्वामी ने सुनाई श्रीकृष्ण लीलाएं, भक्तिरस में डूबा पंडाल
लखनऊ के ऐशबाग स्थित डीएवी कॉलेज में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को समापन हो गया। श्री राधा रमण सेवा समिति की ओर से कथा के अंतिम दिन वृंदावन से आए पुंडरीक गोस्वामी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का वर्णन किया। सुदामा चरित्र सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। भजन-कीर्तन के दौरान पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। पुंडरीक गोस्वामी ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के भूखे हैं। सुदामा चरित्र सच्ची मित्रता, त्याग, निष्ठा और निष्काम प्रेम की प्रेरणा देता है। उन्होंने बाणासुर की पुत्री ऊषा और अनिरुद्ध के प्रसंग के साथ भगवान श्रीकृष्ण की अष्ट पटरानियों की लीलाओं का भी वर्णन किया। राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग के माध्यम से भागवत कथा का आध्यात्मिक महत्व समझाया। देखिए 2 तस्वीरें… दृढ़ और स्थिर होनी चाहिए भक्ति महाराज ने दूध और दही का उदाहरण देते हुए भक्ति को दृढ़ और स्थिर बनाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सद्कर्म, सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। आगामी शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, रामचरितमानस का पाठ, कन्या पूजन और कन्या भोज करने का भी आह्वान किया। कथा के दौरान ‘प्यारो-प्यारो मोहन, वंशी वालो मोहन, मेरो माखन चुराय गयो रे’ भजन गूंजा तो श्रद्धालु झूमने लगे। पंडाल में हरिनाम संकीर्तन और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। 51 तोतों को पिंजरे से किया मुक्त आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि विश्राम दिवस पर शुकदेव जी महाराज के स्वरूप से प्रेरित होकर 51 तोतों को पिंजरे से मुक्त किया गया। इसके बाद विश्राम आरती हुई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। भव्य भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। अमरनाथ मिश्र ने आयोजन में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, अतिथियों और स्वयंसेवकों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि कथा का उद्देश्य समाज में धर्म, भक्ति, सेवा, सदाचार और संस्कारों का प्रसार करना है।
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