लखनऊ विश्वविद्यालय में नवरात्रि-दशहरा पर सांस्कृतिक संध्या:विद्यार्थियों ने नृत्य-नाट्य से नारी शक्ति का संदेश दिया, लघु नाटिका का मंचन

Oct 17, 2026 - 20:45
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लखनऊ विश्वविद्यालय में नवरात्रि-दशहरा पर सांस्कृतिक संध्या:विद्यार्थियों ने नृत्य-नाट्य से नारी शक्ति का संदेश दिया, लघु नाटिका का मंचन
लखनऊ विश्वविद्यालय के द्वितीय परिसर जानकीपुरम स्थित लावण्या हॉल में शनिवार को नवरात्रि के अवसर पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नृत्य, नाट्य और लोक प्रस्तुतियों के जरिए नारी शक्ति, भारतीय संस्कृति और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। विद्यार्थियों के संवाद ने दर्शकों का ध्यान खींचा कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने दीप प्रज्वलित कर की। इसके बाद विद्यार्थियों ने ‘महिषासुर मर्दिनी’ लघु नाटिका का मंचन किया। प्रस्तुति में महिषासुर के अत्याचार और मां दुर्गा के अवतरण से लेकर उसके वध तक के प्रसंग को प्रभावी ढंग से दिखाया गया। विद्यार्थियों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। महिषासुर वध के दृश्य पर पूरा हॉल जयकारों से गूंज उठा। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए छात्र-छात्राएं इसके बाद छात्राओं ने नवदुर्गा के नौ स्वरूपों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया। शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक देवी के विभिन्न रूपों की महिमा को नृत्य और संगीत के माध्यम से दर्शाया गया। पारंपरिक वेशभूषा और भक्तिमय प्रस्तुतियों से कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिक हो गया। गरबा रास भी आकर्षण का केंद्र रहा सांस्कृतिक संध्या में डांडिया और गरबा रास भी आकर्षण का केंद्र रहा। पारंपरिक परिधानों में विद्यार्थियों ने गुजराती और उत्तर भारतीय लोक संस्कृति की झलक पेश की। डांडिया की ताल पर विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ प्रस्तुति दी। शिक्षकों और अधिकारियों ने भी विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया। कुलपति ने कहा- ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को मानवीय मूल्यों से जोड़ते हैं कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने कहा कि नवरात्रि और दशहरा केवल पर्व नहीं, बल्कि अच्छाई की बुराई और ज्ञान की अज्ञान पर जीत का संदेश देते हैं। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जोड़ते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज की बुराइयों और कुरीतियों को दूर करने में सकारात्मक ऊर्जा लगाने का आह्वान किया।

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