लंका दहन, विभीषण शरणागति और सेतु निर्माण का मंचन:बलरामपुर में अंगद-रावण संवाद ने दर्शकों को किया रोमांचित, जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा मैदान
बलरामपुर में श्रीश्री 108 सत्य प्रचारिणी रामलीला समिति की रामलीला में लंका दहन, विभीषण शरणागति, सेतु निर्माण और अंगद-रावण संवाद का मंचन हुआ। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों का मन मोहा। मंचन हनुमानजी के लंका पहुंचने और सीता को श्रीराम का संदेश देने से शुरू हुआ। रावण के आदेश पर पूंछ में आग लगाई गई, जिससे जलती पूंछ से लंका में आग लगा दी गई। इसके बाद विभीषण शरणागति का मंचन हुआ। रावण द्वारा अपमानित किए जाने पर विभीषण श्रीराम की शरण में पहुंचे, जहां श्रीराम ने उन्हें अपनाया। अगले प्रसंग में श्रीराम ने समुद्र तट पर शिवलिंग की स्थापना की। फिर नल-नील के नेतृत्व में वानर सेना ने समुद्र पर सेतु बनाया और लंका की ओर आगे बढ़े। रामलीला का खास आकर्षण अंगद-रावण संवाद रहा। श्रीराम के दूत अंगद ने रावण को सीता लौटाने की सलाह दी, पर रावण नहीं माना। अंगद ने सभा में पैर जमाकर चुनौती दी, जिसे रावण के योद्धा हिला नहीं पाए।
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