लोक गायिका साहिबा ने नवरात्रि पर गाया धार्मिक गीत:इंडियन आयडियल और सारे गामा पा में दे चुकी हैं ऑडिशन

Oct 12, 2026 - 07:19
0
लोक गायिका साहिबा ने नवरात्रि पर गाया धार्मिक गीत:इंडियन आयडियल और सारे गामा पा में दे चुकी हैं ऑडिशन
सुल्तानपुर के शास्त्री नगर की रहने वाली युवा लोक गायिका साहिबा अपनी सुरीली आवाज और कड़ी मेहनत के दम पर संगीत की दुनिया में पहचान बनाने में जुटी हैं। नवरात्रि में धार्मिक गीत गाकर वह लोगों को सौहार्द का संदेश भी दे रही हैं। रविवार को खास बातचीत में साहिबा ने अपने संगीत के सफर, रोजाना के रियाज और भविष्य के सपनों के बारे में बताया। साहिबा का सपना बड़े मंच पर पहुंचकर प्रतिष्ठित गायिका बनना है। इसके लिए वह घर पर ही संगीत के साजों के साथ रोजाना 7 से 8 घंटे अभ्यास करती हैं। परिवार भी उनके सपने को पूरा करने में साथ दे रहा है। पिता मोहम्मद असलम बेटी के संगीत सीखने और आगे बढ़ने पर खर्च करने से पीछे नहीं हटते। कोतवाली नगर के शास्त्री नगर में रहने वाली साहिबा ने अपने हुनर को निखारने के लिए कई मंचों पर किस्मत आजमाई है। उन्होंने 2023 में मुंबई में इंडियन आइडल और 2025 में लखनऊ में आयोजित सारेगामापा के सिंगिंग ऑडिशन में हिस्सा लिया था। इसके अलावा 2025 में अयोध्या में आयोजित गजल मंच और भरतकुंड के सिंगिंग महोत्सव में विजेता भी रहीं। इन मंचों पर मिली सीख और अनुभव के सहारे साहिबा अपनी गायकी को लगातार बेहतर बनाने में जुटी हैं। उनका प्रयास है कि क्षेत्रीय पहचान से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज का जादू बिखेर सकें। रोज 7 से 8 घंटे करती हैं रियाज साहिबा के लिए गायकी सिर्फ शौक नहीं, बल्कि जीवन का लक्ष्य है। वह घर पर संगीत के सभी जरूरी साजों के साथ रोजाना 7 से 8 घंटे अभ्यास करती हैं। उनका मानना है कि गायकी में बेहतर होने के लिए लगातार मेहनत और सुरों की समझ जरूरी है। वह सेमी-क्लासिकल संगीत की बारीकियां सीखने के साथ गजल, भजन, फिल्मी गीत और ठुमरी का भी अभ्यास कर रही हैं। अपनी आवाज में निखार लाने के लिए वह हर विधा को समझने और उसे सही तरीके से गाने पर ध्यान देती हैं। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के गीतों से सीख रहीं बारीकियां साहिबा पुराने हिंदी फिल्मी गीतों को भी अपनी तैयारी का हिस्सा बनाती हैं। वह लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के गाए मशहूर गानों को सीखती हैं। इन गीतों के जरिए वह सुर, आवाज के उतार-चढ़ाव और गायकी की बारीकियों को समझने की कोशिश करती हैं। नवरात्रि के दौरान धार्मिक गीत गाकर वह संगीत के माध्यम से आपसी सौहार्द का संदेश दे रही हैं। अलग-अलग विधाओं में अभ्यास करने का उनका उद्देश्य अपनी गायकी को मजबूत बनाना और श्रोताओं तक अपनी आवाज के जरिए पहुंचना है। पिता का साथ, बड़े मंच पर पहुंचने का सपना साहिबा के पिता मोहम्मद असलम छोटे कारोबारी हैं, जबकि मां महर जहां गृहिणी हैं। तीन बहनों और एक भाई वाले परिवार में साहिबा अपने भाई से बड़ी हैं। उन्होंने वर्ष 2023 में इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह अपने संगीत के जुनून को आगे बढ़ाने में जुट गईं। बेटी के सपने को पूरा करने के लिए पिता असलम आर्थिक सहयोग देने में पीछे नहीं हटते। परिवार के समर्थन और अपनी मेहनत के दम पर साहिबा एक प्रतिष्ठित गायिका बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं। अब उनकी कोशिश ऐसे बड़े मंच तक पहुंचने की है, जहां उनकी आवाज को व्यापक पहचान मिल सके।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User