ममता को दोहरा झटका लगा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया, जबकि गौतम देब ने सिलीगुड़ी महापौर पद छोड़ दिया। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की स्थिति ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 20 जून 2026
ममता सरकार के लिए बढ़ी मुश्किलें
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को एक ही दिन में दो बड़े झटके लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, जबकि उत्तर बंगाल के प्रभावशाली नेता गौतम देब ने सिलीगुड़ी महापौर पद छोड़ दिया है। इन घटनाओं ने पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष और नेतृत्व संकट की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
ज्योतिप्रिय मल्लिक ने छोड़े संगठनात्मक पद
ज्योतिप्रिय मल्लिक ने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बताया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उनकी सेहत लगातार खराब हुई है और गंभीर बीमारियों के कारण वह संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति में नहीं हैं। मल्लिक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना फैसला पहले ही पार्टी नेतृत्व को बता दिया था।विशेष बात यह है कि हाल ही में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें नई कार्यसमिति में महत्वपूर्ण स्थान दिया था। इसके बावजूद उनका इस्तीफा राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है।
लंबे समय तक रहे प्रभावशाली नेता
ज्योतिप्रिय मल्लिक राज्य की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। वह पांच बार विधायक चुने गए और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उत्तर 24 परगना जिले में संगठन को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती रही है।हालांकि वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अपनी पारंपरिक सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले कथित राशन वितरण घोटाले के मामले में उनकी गिरफ्तारी भी काफी चर्चा में रही थी।
गौतम देब ने भी छोड़ा महापौर पद
दूसरी ओर सिलीगुड़ी नगर निगम के महापौर गौतम देब ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा नगर निगम प्रशासन को सौंपते हुए सरकारी सुविधाएं भी वापस कर दीं। उत्तर बंगाल में गौतम देब को तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा माना जाता है।उनके इस्तीफे ने सिलीगुड़ी नगर निगम के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम का कार्यकाल अगले वर्ष तक शेष है और अब प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की संभावना बढ़ गई है।
चुनावी हार के बाद बढ़ा असंतोष
विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय निकायों के पदाधिकारी पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी पराजय के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं।
बागी नेताओं ने बढ़ाई चिंता
राज्य की राजनीति में बागी नेताओं की गतिविधियां भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कई विधायकों और सांसदों द्वारा अलग राजनीतिक रुख अपनाने की खबरों ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इससे संगठनात्मक एकजुटता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष ने साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी ने इन इस्तीफों को तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी का प्रमाण बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी है। वहीं तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इन घटनाओं को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
ज्योतिप्रिय मल्लिक और गौतम देब के इस्तीफों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तृणमूल कांग्रेस इस आंतरिक संकट से कैसे निपटती है और संगठन को दोबारा मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाती है। फिलहाल इन घटनाओं ने राज्य की सियासत को नया मोड़ दे दिया है।