रेजीनगर उपचुनाव में ममता बनर्जी को बड़ी राहत, रबीउल आलम चौधरी ने बदला फैसला

पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लेने के अपने फैसले पर पुनर्विचार किया है। पहले उन्होंने चुनाव से हटने की घोषणा की थी, लेकिन ममता बनर्जी और पार्टी नेताओं से बातचीत के बाद अब दोबारा चुनाव लड़ने की बात कही है। उनके इस फैसले से रेजीनगर उपचुनाव का राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदल गया है।

Sep 19, 2026 - 14:06
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रेजीनगर उपचुनाव में ममता बनर्जी को बड़ी राहत, रबीउल आलम चौधरी ने बदला फैसला

दि राइजिंग न्यूज़ | पश्चिम बंगाल | 19 सितंबर 2026


पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव को लेकर शनिवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। ममता बनर्जी के खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले नामांकन वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। ममता बनर्जी से बातचीत के बाद रबीउल ने दोबारा चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया।

रेजीनगर में अचानक बदला चुनावी घटनाक्रम

पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी को लेकर शनिवार को अचानक नया मोड़ आ गया।
रबीउल ने सुबह चुनाव नहीं लड़ने और अपना नामांकन वापस लेने की घोषणा की थी।
इस घोषणा के बाद ममता बनर्जी के खेमे के लिए इसे एक और बड़ा झटका माना जा रहा था।हालांकि, कुछ ही घंटों बाद रबीउल ने अपना फैसला बदलते हुए चुनाव लड़ने की बात कही।

ममता बनर्जी से बातचीत के बाद बदला फैसला

रबीउल आलम चौधरी के अनुसार, उन्होंने ममता बनर्जी और पार्टी के नेताओं से बातचीत की।इसके बाद उन्होंने अपने पहले फैसले पर दोबारा विचार किया और उपचुनाव में बने रहने का निर्णय लिया।रबीउल के फैसले में बदलाव के बाद रेजीनगर सीट पर ममता बनर्जी के खेमे को तत्काल राहत मिली है।मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुरक्षा और चुनाव प्रचार से जुड़ी चिंताओं पर भी बातचीत हुई थी।

पहले नामांकन वापस लेने की बात क्यों कही थी

रबीउल आलम चौधरी ने शुरुआत में चुनाव से हटने के पीछे कई परेशानियों का उल्लेख किया था।इनमें नए चुनाव चिह्न को मतदाताओं तक कम समय में पहुंचाने और पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा शामिल था।कुछ रिपोर्टों में कार्यकर्ताओं पर दबाव और प्रचार में आ रही कठिनाइयों का भी उल्लेख किया गया।इन्हीं परिस्थितियों के बीच उन्होंने पहले अपना नामांकन वापस लेने की घोषणा की थी।

नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी आया था संकट

रेजीनगर का घटनाक्रम नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से जुड़े घटनाक्रम के ठीक बाद सामने आया।नंदीग्राम में ममता बनर्जी के खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी।इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की थी।मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ गया।

6 अक्टूबर को होना है उपचुनाव

रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना निर्धारित है।इन दोनों सीटों पर चुनावी समीकरणों को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी के फिर से चुनाव लड़ने के फैसले के बाद मुकाबले की तस्वीर में बदलाव आया है।अब रबीउल के प्रचार और पार्टी संगठन की आगामी गतिविधियों पर नजर रहेगी।

चुनाव चिह्न को लेकर भी बना हुआ है विवाद

रेजीनगर उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद का असर चुनावी तैयारियों पर भी दिखाई दे रहा है।निर्वाचन आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग नाम और नए चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं।ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को नया नाम और नया चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को भी अलग पहचान दी गई है।ऐसे में उम्मीदवारों के सामने नए चुनाव चिह्न को मतदाताओं तक पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।

रेजीनगर में अब क्या होगा

रबीउल आलम चौधरी के फैसले में बदलाव के बाद रेजीनगर उपचुनाव में ममता बनर्जी के खेमे की मौजूदगी बरकरार रहेगी।सुबह नामांकन वापस लेने की घोषणा और दोपहर तक चुनाव लड़ने के फैसले ने इस सीट के राजनीतिक घटनाक्रम को अचानक बदल दिया।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रबीउल कितनी तेजी से चुनाव प्रचार शुरू करते हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं का उन्हें कितना सहयोग मिलता है।6 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले रेजीनगर सीट पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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