'बड़ा धोखेबाज...', मक्का रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तान पर बरसे अमेरिका के पूर्व सुरक्षा सलाहकार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एच. आर. मैकमास्टर ने मक्का रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तान और तुर्किए की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए इस समझौते में सामूहिक सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा सहयोग बढ़ाने का प्रावधान है।

Sep 19, 2026 - 15:03
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'बड़ा धोखेबाज...', मक्का रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तान पर बरसे अमेरिका के पूर्व सुरक्षा सलाहकार

दि राइजिंग न्यूज़ | सऊदी अरब | 19 सितंबर 2026

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एच. आर. मैकमास्टर ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तान और तुर्किए की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से समझौते की शर्तों को लागू करने की क्षमता और उसके पीछे संभावित उद्देश्यों को लेकर संदेह जताया।

मक्का रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तान पर सवाल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एच. आर. मैकमास्टर ने मक्का रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते की वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। मैकमास्टर ने पाकिस्तान की नीतियों और समझौते को लागू करने की उसकी क्षमता पर संदेह जताया है। हालांकि, उनके कुछ दावों के समर्थन में सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं रखे गए हैं।

7 अगस्त को हुआ था मक्का रक्षा समझौता

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के अनुसार तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। तुर्किए की ओर से बाद में इस व्यवस्था की तुलना उत्तर अटलांटिक संधि संगठन की सामूहिक रक्षा व्यवस्था से की गई थी।

पाकिस्तान की भूमिका पर मैकमास्टर ने जताया संदेह

मैकमास्टर ने पाकिस्तान को लेकर कहा कि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान समझौते में तय शर्तों को वास्तविक रूप से लागू करता है या नहीं। उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों में अलग-अलग दिशाओं में एक साथ काम करने की प्रवृत्ति का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समझौता कुछ हद तक दिखावटी हो सकता है और इसके पीछे सऊदी अरब से पाकिस्तान की ओर आर्थिक सहायता का प्रवाह बनाए रखने का उद्देश्य हो सकता है। यह मैकमास्टर का आकलन है और इसके समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है।

पाकिस्तान ने समझौते को बताया महत्वपूर्ण कदम

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का रक्षा समझौते को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया था। पाकिस्तान की ओर से इसे तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को और मजबूत करने वाला समझौता बताया गया है। इस समझौते के जरिए तीनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों को संस्थागत रूप देने की बात कही गई है। ऐसे में मैकमास्टर की टिप्पणियों ने इस समझौते के उद्देश्यों और उसके संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

तुर्किए की नीतियों पर भी उठाए सवाल

मैकमास्टर ने तुर्किए की भूमिका को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी तुर्किए के लोगों के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन की सरकार और उनकी पार्टी की नीतियों को लेकर है। उन्होंने तुर्किए की सरकार पर कतर से मिलने वाले आर्थिक सहयोग के साथ मुस्लिम ब्रदरहुड और कुछ अन्य संगठनों को समर्थन देने वाली नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। मैकमास्टर ने इन संगठनों पर उग्रवादी आतंकवाद और नफरत की विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया है।

मक्का समझौते में क्या है

मक्का में हुए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच सामूहिक सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। समझौते में कहा गया है कि किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके लिए तीनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों तथा सैन्य प्रमुखों के स्तर पर नए समन्वय तंत्र तैयार करने की योजना है। इसके अलावा संयुक्त सैन्य अभ्यास, वायु रक्षा, ड्रोन तथा अन्य मानवरहित प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग की बात भी कही गई है।

रक्षा तकनीक में सहयोग की भी योजना

समझौते के तहत तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित रखने के बजाय तकनीकी क्षेत्र में भी बढ़ाने की बात कही गई है। इसमें वायु रक्षा प्रणालियों और मानवरहित प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग शामिल है। साथ ही रक्षा तकनीक के संयुक्त विकास पर भी काम करने की योजना बताई गई है। इससे तीनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग का दायरा बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है।

मुख्य बातें

  • मक्का रक्षा समझौते पर सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने 7 अगस्त 2026 को हस्ताक्षर किए।
  • किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
  • एच. आर. मैकमास्टर ने पाकिस्तान की भूमिका और समझौते को लागू करने की क्षमता पर सवाल उठाए।
  • मैकमास्टर ने तुर्किए की सरकार की नीतियों को लेकर भी टिप्पणी की।
  • समझौते में संयुक्त सैन्य अभ्यास, वायु रक्षा और मानवरहित प्रणालियों में सहयोग की बात है।
  • रक्षा तकनीक के संयुक्त विकास की भी योजना बताई गई है।

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