मां अन्नपूर्णा के दरबार में उमड़ी भक्तों की भीड़:मंदिर के बाहर लगी लंबी कतार,पुजारी बोले-माता के दर्शन से धन-धान्य की होती है प्राप्ति

Oct 18, 2026 - 09:35
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मां अन्नपूर्णा के दरबार में उमड़ी भक्तों की भीड़:मंदिर के बाहर लगी लंबी कतार,पुजारी बोले-माता के दर्शन से धन-धान्य की होती है प्राप्ति
शारदीय नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की आराधना के अवसर पर काशी में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा। मां अन्नपूर्णा के दरबार में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की कतार लगी रही। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और माता के चरणों में शीश नवाकर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा। भक्तों ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर अपनी आस्था प्रकट की और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। देखें तस्वीरें… धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा अन्न, धन-धान्य और पोषण की देवी हैं। उनकी कृपा से घर में अन्न की कमी नहीं होती और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। नवरात्र में मां के दर्शन को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा अपने भक्तों को अन्न-धन से परिपूर्ण रहने का आशीर्वाद देती हैं। वहीं, मां महागौरी की पूजा से जीवन में सुख-शांति, सौभाग्य और सकारात्मकता आने की कामना की जाती है। कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से माता की आराधना करती हैं, जबकि सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए प्रार्थना करती हैं। मां महागौरी का स्वरूप और धार्मिक महत्व नवरात्र की आठवीं तिथि को महाष्टमी कहा जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता का वर्ण अत्यंत गौर है, इसलिए उन्हें महागौरी कहा जाता है। माता को शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। उनकी चार भुजाएं हैं और वे वृषभ पर सवार रहती हैं। मां महागौरी की आराधना करने वाले भक्त जीवन से दुख, संकट और नकारात्मकता दूर होने की कामना करते हैं। कैसे करें मां महागौरी की पूजा? महाष्टमी पर सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा और मां महागौरी का ध्यान करते हुए व्रत एवं पूजा का संकल्प लें। माता को सफेद या गुलाबी फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और फल अर्पित करें। मां महागौरी को सफेद रंग प्रिय माना जाता है। ऐसे में सफेद मिठाई या नारियल का भोग श्रद्धापूर्वक लगाया जा सकता है। इसके बाद दुर्गा चालीसा, महागौरी की कथा और मंत्रों का पाठ करें। अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। कन्या पूजन का विशेष महत्व महाष्टमी पर कन्या पूजन की भी परंपरा है। इसमें नौ वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। श्रद्धालु कन्याओं के पैर धोकर उन्हें तिलक लगाते हैं और भोजन कराते हैं। इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। कई परिवारों में कन्या पूजन नवमी तिथि पर भी किया जाता है।

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