मेरठ में CCSU में 26-27 सितंबर को होगी ज्ञानसभा-2026:शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर 7 सेशन में होगी चर्चा, 35 से ज्यादा कुलपति करेंगे मंथन
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में 26 और 27 सितंबर को देशभर के शिक्षाविद शिक्षा के भविष्य पर चर्चा करेंगे। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से ज्ञानसभा-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसका मुख्य विषय ‘विकसित भारत हेतु शिक्षा का स्वरूप’ रखा गया है। दो दिन के कार्यक्रम में देशभर के 35 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल होंगे। इनके अलावा शिक्षक, विद्यार्थी, शिक्षा विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य लोग भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा, युवा, नवाचार, उद्यमिता, संस्कार, कौशल, रोजगार और भारतीयता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम को लेकर गुरुवार को CCSU के कुलपति कार्यालय के कमेटी हॉल में प्रेस वार्ता हुई। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, प्रो. अनिल मलिक, प्रो. कृष्णकांत शर्मा और प्रो. राकेश कुमार शर्मा ने कार्यक्रम की जानकारी दी। पहले दिन शिक्षा के स्वरूप पर होगी शुरुआत 26 सितंबर को सुबह 10:30 बजे कार्यक्रम की शुरुआत होगी। पहले सेशन का विषय ‘विकसित भारत हेतु शिक्षा का स्वरूप’ है। इसमें अतिथियों का स्वागत, दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और ज्ञानसभा की शुरुआत की जानकारी दी जाएगी। डॉ. अतुल कोठारी बीज मुख्य वक्ता रहेंगे। वहीं आरएसएस के सह-सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगे। सेशन की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला करेंगी। इसके बाद ‘युवा नवाचार उद्यमिता—विकसित भारत 2047 की ओर’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें युवाओं के लिए नवाचार, उद्यमिता और कौशल के साथ विकसित भारत में उनकी भूमिका पर बात होगी। इसी दौरान छात्रों के साथ एक अलग संवाद भी होगा। इसका विषय ‘ज्ञान से जीवन तक—ऐसी शिक्षा जो बच्चे को पढ़ाए ही नहीं, जीना भी सिखाए’ रखा गया है। विद्यार्थी और शिक्षक की भूमिका पर भी चर्चा तीसरे सेशन में ‘विद्यार्थी से व्यक्तित्व तक—कैसी शिक्षा राष्ट्र-निर्माता बनाएगी?’ विषय पर बात होगी। इसमें पढ़ाई के साथ बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र विकास पर चर्चा होगी। चौथे सेशन में ‘21वीं सदी का आदर्श शिक्षक कैसा हो?’ विषय रहेगा। इसमें बदलते समय के साथ शिक्षक की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा की जाएगी। पांचवें सेशन में ‘भारतीयता, विज्ञान और तकनीक—ऐसी शिक्षा जो जड़ों से जोड़े और विश्व में आगे बढ़ाए’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, विज्ञान और तकनीक को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के मुद्दे पर विचार होगा। मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. वाई. विमला अध्यक्षता करेंगी। दूसरे दिन रोजगार और कौशल पर फोकस 27 सितंबर को छठे सेशन में ‘कक्षा से कर्मभूमि तक—शिक्षा को रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता से कैसे जोड़ें?’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें इस बात पर मंथन होगा कि पढ़ाई को रोजगार और कौशल से कैसे जोड़ा जाए, ताकि छात्र पढ़ाई के बाद अपने पैरों पर खड़े हो सकें। कार्यक्रम के आखिरी सेशन का विषय ‘ज्ञानसभा से जनसभा तक—विकसित भारत के लिए शिक्षा का संकल्प’ रहेगा। इसमें दो दिनों की चर्चा से सामने आए मुद्दों और आगे की दिशा पर बात होगी। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज मित्तल मुख्य वक्ता होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. संगीता शुक्ला करेंगी। परिवार और समाज की भूमिका पर भी बात कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग समूहों में भी चर्चा होगी। इनमें ‘विद्यार्थी से व्यक्तित्व तक’, ‘स्कूल अकेला नहीं बना सकता संस्कार—परिवार, विद्यालय और समाज की साझी जिम्मेदारी’, ‘गुरु व्यवस्था, शिक्षा और संस्कार’ और ‘21वीं सदी का आदर्श शिक्षक कैसा हो?’ जैसे विषय शामिल हैं। इन सभी सेशन में प्रो. सचिन माहेश्वरी, प्रो. उमेश सिंह, देवराज शर्मा, डॉ. उमाशंकर पचौरी, डॉ. अशोक मण्डोला, डॉ. सतहंस, मदन चौहान और संदीप कंवर समेत कई शिक्षाविद और विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। विभिन्न सेशन की अध्यक्षता प्रो. रणविजय सिंह, प्रो. हरप्रीत सिंह, प्रो. आरएस जादौन, प्रो. दीपक छौंकर, प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, प्रो. सविता सेंगर, प्रो. ज्ञानेन्द्र प्रताप और प्रो. संगीता शुक्ला समेत अन्य शिक्षाविद करेंगे। कार्यक्रम के संचालन और व्यवस्था में प्रो. अनिल मलिक, प्रो. केके शर्मा, प्रो. डॉ. नीलम कुमारी, प्रो. राजीव अग्रवाल, डॉ. शिव ओम, प्रो. हितेंद्र त्यागी, डॉ. वीरेंद्र तिवारी, डॉ. संदीप जमदग्नि, डॉ. राजेश प्रसाद सिंह, डॉ. राजीव चौहान, भूपेंद्र, डॉ. अनुपम तिवारी, डॉ. लक्ष्मण नागर, गजेंद्र सिंह पुंडीर, मनोज चौहान और प्रो. सुरेश शर्मा समेत कई लोग जिम्मेदारी संभालेंगे। सिर्फ डिग्री और नौकरी तक सीमित नहीं रहेगी चर्चा आयोजकों का कहना है कि शिक्षा को सिर्फ डिग्री और नौकरी तक सीमित न रखकर चरित्र निर्माण, संस्कार, कौशल, नवाचार, उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों और विकसित भारत के लिए जरूरी बदलावों पर अलग-अलग पक्ष सामने रखे जाएंगे। विश्वविद्यालय के मुताबिक 35 से ज्यादा कुलपतियों के साथ बड़ी संख्या में शिक्षाविदों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी से कार्यक्रम में शिक्षा के भविष्य पर व्यापक चर्चा होगी। प्रेस वार्ता में वित्त अधिकारी रमेश चंद्र, प्रो. इंचार्ज मीडिया सेल प्रो. मुकेश कुमार शर्मा, डॉ. अलका तिवारी, इंजीनियर प्रवीण पवार, प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता समेत विश्वविद्यालय के अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।
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