मेरठ में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित:अष्टांग योग के उपदेश का वर्णन, तीसरे दिन उमड़ी भक्तों की भीड़
मेरठ के चन्द्रलोक पार्क में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य जनार्दन तिवारी ने भगवान कपिल की उत्पत्ति, माता देवहुति को भगवान कपिल द्वारा दिए गए अष्टांग योग के उपदेश सहित विभिन्न भक्त चरित्रों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को बताया गया कि मनुष्य को जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में भगवान का स्मरण एवं उनका अवलम्बन बनाए रखना चाहिए। मुख्य यजमान जय भगवान मित्तल रहे। कथा में चौबीस नरकों का वर्णन, अजामिल उपाख्यान, ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र एवं गजेन्द्र मोक्ष के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा व्यास ने इन प्रसंगों के माध्यम से बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिसने भगवान का आश्रय लिया, उसे प्रभु की कृपा अवश्य प्राप्त हुई। आचार्य जनार्दन तिवारी ने कहा कि यदि समाज में किसी व्यक्ति के विषय में किसी प्रकार की तीखी प्रतिक्रिया या विपरीत बात सामने आए, तो उसे प्रभु का प्रसाद मानकर ईर्ष्या और द्वेष से बचना चाहिए। मनुष्य को आलोचना और विपरीत परिस्थितियों में भी अपना धैर्य एवं संयम नहीं खोना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण केवल विपत्ति के समय ही नहीं, बल्कि जब जीवन संसाधनों और सुख-सुविधाओं से भरपूर हो, तब भी निरंतर करना चाहिए। सुख के समय भगवान को भूल जाना और दुख के समय उन्हें याद करना सच्ची भक्ति नहीं है। कथा के दौरान चन्द्रलोक पार्क में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजन, भगवान के जयकारों और भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
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