महिला की मौत के बाद नदी में बहाई लाश:झांसी में 10 दिन बाद पुलिस ने बरामद की, जेठ बोले- पेट में बच्चा था, इसलिए नहीं जलाई
झांसी में महिला की मौत होने के बाद परिजनों ने शव को बेतवा नदी में बहा दिया। लगभग 10 दिन बाद शव पानी के ऊपर आया तो हड़कंप मच गया। पुलिस ने शव बरामद कर मोर्चरी में रखवाया। इसका पता चलने पर परिजन थाने पहुंच गए। जेठ ने कहा- बहू के पेट में बच्चा था। इसलिए बुजुर्गों ने शव को जलाने से मना कर दिया और नदी में प्रवाहित करने की सलाह दी। शनिवार को बाह्मणभोज कराने की तैयारी कर रहे थे। उससे पहले दोबारा लाश मिल गई। अब दोबारा अंतिम संस्कार करेंगे। आज शुक्रवार को पुलिस पंचनामा भरकर शव का पोस्टमार्टम करा रही है। 3 साल पहले हुई थी शादी मृतका की पहचान झिल्ली (32) पत्नी उमाशंकर राजपूत के रूप में हुई है। वह चिरगांव के औपारा डेरा की रहने वाली थी। मृतका के जेठ पहलवान सिंह ने बताया- मेरे छोटे भाई की शादी मेरी साली झिल्ली से हुई थी। जो उड़ीसा की रहने वाली थी। छोटा भाई उमाशंकर खेती किसानी के साथ मजदूरी करता था। झिल्ली लगभग 7 महीने की गर्भवती थी। सबकुछ ठीक चल रहा था। 29 सितंबर को उसे अचानक पेट में तेज दर्द होने लगा। तब हम लोग साली को झांसी के प्राइवेट अस्पताल में ले गए। वहां पर इलाज के दौरान साली की मौत हो गई। नदी में बहा दिया था शव जेठ ने आगे बताया- शव को गांव ले गए। तब बुजुर्गों ने कहा कि पेट में बच्चा है, इसलिए शव को जला नहीं सकती। इसलिए शव लेकर रामनगर स्थित बेतवा नदी पर पहुंचे। रस्म अदा करके शव को नदी में प्रवाहित कर दिया था। गुरुवार को शव ऊपर आ गया। सूचना पर पुलिस पहुंच गई और शव को कब्जे में ले लिया। खबर लगते ही हम लोग थाने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी दी। शनिवार को बाह्मणभोज होने थे। अब दोबारा से अंतिम संस्कार करेंगे। बीमारी से मौत हो गई थी चिरगांव थाना प्रभारी बलराज शाही ने बताया कि नदी में एक महिला का शव मिला था। जिसकी शिनाख्त झिल्ली के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि झिल्ली गर्भवती थी। बीमार होने पर परिजनों ने उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया था। इलाज के दौरान मौत होने पर परिजनों ने शव नदी में प्रवाहित कर दिया था। आज पंचनामा भरकर शव का पोस्टमार्टम करवाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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