महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए लखनऊ में मार्च:लॉ की छात्रा संविधा बोलीं- महिलाओं की हालत में सुधार नहीं, हमें मार्च रद्द करने के लिए फोन आए
महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर उनके अधिकारों को लेकर शी स्पीक्स लखनऊ की ओर से मार्च निकाला गया। लखनऊ विश्वविद्यालय से परिवर्तन चौक तक प्रस्तावित इस मार्च में आरजी कर समेत देश में महिलाओं के खिलाफ हुई घटनाओं का मुद्दा उठाया गया। मार्च में शामिल लखनऊ विश्वविद्यालय की लॉ छात्रा संविधा ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मार्च देशभर में ऐसी घटनाओं की पीड़ित महिलाओं के प्रति एकजुटता जताने के लिए निकाला गया। आरजी कर से लेकर वनस्थली और एलपीयू की घटनाओं का जिक्र संविधा ने कहा कि आरजी कर की घटना के बाद महिलाओं का बड़ा आंदोलन शुरू हुआ था। इस घटना को करीब दो साल होने वाले हैं, लेकिन उनके मुताबिक महिलाओं की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने वनस्थली, जम्मू और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में सामने आए मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि मार्च के जरिए इन घटनाओं से प्रभावित महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाई जा रही है। मार्च रद्द करने या टालने के लिए फोन आने का आरोप मार्च के दौरान पुलिस बल की तैनाती और अनुमति को लेकर पूछे गए सवाल पर संविधा ने कहा कि उन्हें पुलिस अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फोन आए थे। उनके मुताबिक, उनसे मार्च रद्द करने या आगे के लिए टालने को कहा गया, क्योंकि उनके पास अनुमति नहीं थी। संविधा ने आरोप लगाया कि मार्च को लेकर उन पर दबाव बनाया गया। दूसरे छात्र संगठनों के प्रदर्शनों से की तुलना संविधा ने कहा कि जब एनएसयूआई और एससीएस के छात्र प्रदर्शन करते हैं या एबीवीपी के कार्यकर्ता परिसर में गतिविधियां करते हैं, तब उनसे अनुमति के बारे में इसी तरह सवाल नहीं पूछे जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं की ओर से आयोजित मार्च को लेकर अलग तरह की जांच-पड़ताल की गई। इसे उन्होंने 'जेंडर्ड स्क्रूटनी' यानी लिंग के आधार पर अलग नजरिए से जांच किए जाने का मामला बताया। बोलीं- हमने अपना संगठन बनाया, महिलाओं के साथ एकजुटता जताने निकले संविधा ने कहा कि मार्च आयोजित करने वाला समूह किसी बड़े संगठन के समर्थन से नहीं, बल्कि अपने स्तर पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना संगठन खड़ा किया और महिलाओं के साथ एकजुटता जताने के उद्देश्य से यह मार्च आयोजित किया। उनके आरोप के मुताबिक, अनुमति का मुद्दा उठाकर उन्हें मार्च निकालने से रोकने की कोशिश की गई।
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