महोबा के जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़:दलते मौसम में वायरल बुखार का बढ़ा प्रकोप, 646 से ज्यादा मरीज पहुंचे अस्पताल
बदलते मौसम के साथ ही क्षेत्र में वायरल बुखार का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। शहर से लेकर गांवों तक बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने से पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने तक लंबी कतारें लग रही हैं। मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। मौसम के मिजाज में आए बदलाव के साथ लोगों की थोड़ी सी लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ने लगी है। गांव, कस्बे और शहरों में तेज बुखार, सर्दी-खांसी और कमजोरी की शिकायत वाले मरीज बढ़े हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अस्पताल में जांचे गए करीब 200 संदिग्ध मरीजों के सैंपल में डेंगू, मलेरिया या टाइफाइड की पुष्टि नहीं हुई है। गुरुवार को जिला अस्पताल की ओपीडी खुलते ही मरीजों और तीमारदारों की भारी भीड़ जमा हो गई। रजिस्ट्रेशन पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और दवा काउंटर तक लोगों को अपनी बारी के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ा। बुधवार को जिला अस्पताल में 646 से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंचे। इनमें करीब 50 प्रतिशत मरीज संक्रामक बीमारियों से पीड़ित पाए गए। आईपीडी में 101 मरीजों को वार्ड में भर्ती किया गया, जबकि इमरजेंसी में 54 मरीजों का इलाज हुआ। इनमें से 11 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर भी किया गया। 20 मरीजों को वार्ड में भर्ती कराना पड़ा पिछले 24 घंटे के भीतर बुखार, सर्दी और खांसी से गंभीर रूप से पीड़ित 20 मरीजों को अस्पताल के वार्ड में भर्ती कराना पड़ा। भर्ती होने वालों में बच्चों से लेकर उम्रदराज मरीज तक शामिल हैं। इससे अस्पताल में वायरल और संक्रमण संबंधी बीमारियों का दबाव बढ़ने का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस समय ओपीडी में आने वाले मरीज मुख्य रूप से तेज बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द और शारीरिक कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार बदलते मौसम में इन लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। करीब 200 संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांचे अस्पताल में वायरल बुखार के बढ़ते मामलों के बीच करीब 200 संदिग्ध मरीजों के सैंपल की जांच की गई। जांच में डेंगू, मलेरिया या टाइफाइड के लक्षण नहीं मिले हैं। इससे फिलहाल इन गंभीर संक्रामक बीमारियों की पुष्टि नहीं हुई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने गुरुवार सुबह करीब 10 बजे बताया कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी तुलनात्मक रूप से कम होने के कारण वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ रहे हैं। खान-पान में सावधानी बरतने की सलाह डॉक्टरों ने लोगों से बदलते मौसम में सतर्कता बरतने की अपील की है। खान-पान में सावधानी रखने और साफ-सफाई का ध्यान रखने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों का कहना है कि बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द, खांसी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जा सके।
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