महोबा मे बेटियों ने DM से मांगा बारात घर:कलेक्ट्रेट पहुंचकर बोलीं- 1700 की आबादी कहां कार्यक्रम करे, बाराती ताना मारते हैं

Oct 16, 2026 - 12:19
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महोबा मे बेटियों ने DM से मांगा बारात घर:कलेक्ट्रेट पहुंचकर बोलीं- 1700 की आबादी कहां कार्यक्रम करे, बाराती ताना मारते हैं
जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे 15 से 18 वर्ष की 13 किशोरियां अपने गांव में बारात घर बनवाने की मांग लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंचीं। मामला सदर तहसील की रैपुराकला ग्राम पंचायत के बनिया तला मजरे का है। किशोरियों का कहना है कि करीब 1700 की आबादी वाले उनके गांव में बारात घर नहीं होने से शादी-विवाह के दौरान परेशानी होती है। बारातियों के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीणों को ताने सुनने पड़ते हैं। उन्होंने ग्राम प्रधान से कई बार मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर डीएम को प्रार्थना पत्र देकर बारात घर बनवाने की गुहार लगाई। बनिया तला मजरे की इन किशोरियों का कहना है कि आने वाले वर्षों में उनकी भी शादी होनी है, लेकिन गांव में बारात घर नहीं होने की समस्या उन्हें अभी से परेशान कर रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में शादी के दौरान बारातियों के ठहरने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में मजबूरी में बारातियों को खुले खेतों में ठहराना और वहीं भोजन की व्यवस्था करनी पड़ती है। किशोरियों का आरोप है कि सरकारी स्कूल में बारात ठहराने की अनुमति भी नहीं दी जाती। ग्रामीणों के अनुसार, उचित व्यवस्था नहीं होने से बारातियों की ओर से ताने सुनने पड़ते हैं और कई बार शादी के रिश्तों पर भी इसका असर पड़ता है। उनका दावा है कि बारात ठहराने की व्यवस्था न देखकर कुछ मामलों में वर पक्ष शादी से इनकार कर देता है। शुक्रवार को मंजली, शगुन, सरोज, मीरा, रोशनी, जयंती, अनीता, संगीता, नेहा, निकिता, रामसखी, उमा और पूजा समेत 13 किशोरियां जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने बताया कि आसपास के गांवों और मजरों में बारात घर बने हुए हैं, लेकिन उनके गांव में अब तक इसकी व्यवस्था नहीं की गई है। किशोरियों ने बताया कि ग्राम प्रधान से बार-बार मांग करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने खुद पहल करते हुए डीएम को प्रार्थना पत्र सौंपा और गांव में जल्द बारात घर बनवाने की मांग की। अब ग्रामीणों और किशोरियों को प्रशासन की ओर से कार्रवाई किए जाने का इंतजार है। उनका कहना है कि बारात घर बनने से गांव में शादी-विवाह के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी और लोगों को बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी

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