महोबा में दुर्गा प्रतिमाओं की धूम:184 पंडालों में सुरक्षा के इंतजाम, बंगाल-बिहार के कारीगरों ने तैयार कीं प्रतिमाएं
महोबा में शारदीय नवरात्र शुरू होते ही महोबा में भक्तिमय माहौल बन गया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक दुर्गा पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित करने की तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। इस बार पश्चिम बंगाल और बिहार से आए कारीगरों की बनाई दुर्गा प्रतिमाओं की मांग आसपास के कई जिलों में रही। वहीं, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने जिले के 184 दुर्गा पंडालों में सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। प्रयागराज की मिट्टी और बांदा के घास से तैयार कीं प्रतिमाएं महोबा में बंगाल और बिहार से आए मूर्तिकार कई महीनों से दुर्गा प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे थे। वरिष्ठ मूर्तिकार कृष्ण कुमार दास और उनके बेटे मुकेश ने बताया कि प्रतिमाओं को बनाने में मिट्टी, घास और कोलकाता से मंगाई गई विशेष सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमाओं के निर्माण में प्रयागराज की मिट्टी और बांदा के घास का भी उपयोग किया गया। इस बार मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ काली जी की विशाल प्रतिमाओं की भी मांग रही। महोबा में तैयार की गई मूर्तियां हमीरपुर, बांदा और मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी भेजी गई हैं। स्थानीय लोग कारीगरों की कला और मेहनत की सराहना करते हैं। गांवों में जागरण, भंडारे और भजन-कीर्तन की तैयारी नवरात्र का उत्साह शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। गांव-गांव में पूजा समितियों ने पंडाल सजाने और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां की हैं। स्थानीय श्रद्धालु अशोक कुमार सेन और सत्येंद्र राजपूत ने बताया कि नवरात्र के दौरान माता के जागरण, भंडारे, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए श्रद्धालु मां भगवती की आराधना के साथ सामूहिक भागीदारी और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं। 184 पंडालों में पुलिसकर्मियों की तैनाती नवरात्र के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर के सभी 184 दुर्गा पूजा पंडालों और प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था की गई है। यहां एंटी रोमियो स्क्वॉड, मिशन शक्ति, पीआरडी, होमगार्ड और सब-इंस्पेक्टर स्तर के पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और त्योहार के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकना है, ताकि लोग शांतिपूर्वक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सकें।
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