मिर्जापुर में भागवत कथा:कंस वध और रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन, उमड़े श्रद्धालु
मिर्जापुर के जद्दूपुर, पड़री में चल रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास पंडित विष्णु धर द्विवेदी ने रास का महत्व समझाते हुए कहा कि जीवात्मा का निष्कपट भाव से परब्रह्म परमात्मा में मिलन ही रास है। इसके पश्चात भगवान ने मथुरा में प्रवेश कर धोबी, दर्जी, माली और कुबजा को आशीर्वाद दिया। धनुष भंग व कुबलयापीड हाथी का वध करते हुए मात्र 11 वर्ष 56 दिन की आयु में कंस का उद्धार किया तथा माता-पिता व नाना को कारागार से मुक्त कराया। कथा के अगले क्रम में मगध नरेश जरासंध ने मथुरा पर सत्रह बार आक्रमण किया और कालयवन ने एक करोड़ दैत्यों की सेना के साथ धावा बोला। भगवान ने अपनी लीला से कालयवन को मुचकुंद राजा द्वारा जगाया, जिनकी दृष्टि की अग्नि से कालयवन भस्म हो गया। इसके बाद भगवान ने समुद्र के भीतर सुंदर द्वारका नगरी बसाई। भगवान के पास गुप्त संदेश आने पर वे कुण्डिनपुर नरेश महाराज भीष्मक के यहां पधारे और माता रुक्मणी को द्वारकाधाम लाकर उनका पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया। इस अवसर पर पंडित श्रीनिवास ओझा, चड्ढा गुरु, प्रेम शंकर ओझा, जिला उपाध्यक्ष उदय भान तिवारी, डॉ सी एल बिंद, जिला मंत्री भाजपा युवा मोर्चा शशांक त्रिपाठी, संकल्प पाठक, लक्ष्मी शंकर दुबे, पन्नालाल, राजरूप, राम रूप, शिव स्वरूप, महेश्वर, विजय प्रसाद, प्रमोद, माधवी शुक्ला, भास्कर, रमाशंकर त्रिपाठी, कमलेश दुबे, आनंद और भाजपा नेता व समाजसेवी प्रसून शुक्ला सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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