मंडल को आधार बनाकर जातिगत समीकरण साधेंगे अखिलेश:ब्राह्मण, मुस्लिम, यादव, अतिपिछड़े, दलित को अलग-अलग जिलों में मिलेगी जिम्मेदारी
सपा प्रमुख अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव को लेकर जातिगत समीकरण साधने में जुटे हैं। इसके लिए मंडलों को आधार बनाया जा रहा है। गोरखपुर मंडल के 5 संगठनात्मक जिलों में अलग-अलग जातियों को महत्व दिया जाएगा। एक जिले में ब्राह्मण, एक में यादव, एक जगह मुस्लिम एक-एक में दलित व अतिपिछड़े को जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। शिक्षक एमएलसी चुनाव के बाद जिलाध्यक्षों की घोषणा हो सकता है। मंडल को आधार बनाने के पीछे तर्क है कि एक जिले में जिस जाति का जिलाध्यक्ष बनाया जाएगा, उसका प्रभाव पूरे मंडल पर पड़ेगा और उसके जाति के मतदाताओं को साधने में आसानी होगी। अखिलेश यादव ने अलग-अलग कारणों से गोरखपुर जिला, गोरखपुर महानगर की कार्यकारिणी एवं सभी फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया था। लेकिन जब बदलाव होगा तो मंडल के अन्य 3 जिलों में भी होगा। इन जिलों में जिलाध्यक्ष की कुर्सी पाने के लिए नेताओं में जोर-आजमाइश जारी है। यादव नेता गोरखपुर में एक बार फिर जिलाध्यक्ष का पद पाने की कोशिश में हैं। सपा सूत्रों की मानें तो गोरखपुर में यादव नेता को जिम्मेदारी दी भी जा सकती है। लेकिन यह मुश्किल है कि किसी पुराने नेता को यह जिम्मेदारी दी जाए। किसी युवा चेहरे को यहां से जिम्मेदारी मिल सकती है। गोरखपुर या कुशीनगर में मुस्लिम चेहरा मिल सकता है एक मुस्लिम चेहरे को जिम्मेदारी देने की चर्चा है। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि गोरखपुर या कुशीनगर में से किसी एक जिले में मुस्लिम जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। इससे पूरे मंडल में यह संदेश जाएगा कि मुस्लिमों को भी पद दिया जा रहा है। हालांकि मुस्लिम पूरी तरह से सपा के साथ बताए जाते हैं लेकिन एक पद के जरिए उनको सम्मान देने का तर्क भी पार्टी रख सकेगी। मुस्लिम चेहरे को कुशीनगर जिले में जिम्मेदारी मिलने की अधिक संभावना है। ऐसा हुआ तो गोरखपुर में किसी युवा यादव चेहरे को जिलाध्यक्ष का पद मिल सकता है। देवरिया में अतिपिछड़ा समाज से जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा देवरिया में अतिपिछड़ा समाज से जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। सपा सूत्रों की मानें तो यहां कुशवाहा समाज के नेता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। जिले में इस समाज के एक कद्दावर नेता इस दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। वह दो बार विधायक भी रह चुके हैं। संभावना जतायी जा रही है कि इस बार गोरखपुर शहर में किसी ब्राह्मण को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि यहां के मुस्लिम नेता भी सक्रिय हैं। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस बार ब्राह्मण युवा चेहरे पर दांव लगाने की पूरी तैयारी है। इसी तरह महराजगंज जनपद में एक दलित चेहर का नाम अगले जिलाध्यक्ष के रूप में सबसे आगे है।
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