मऊ के 15 सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत:हाईकोर्ट ने बिना सुनवाई की गई कार्रवाई निरस्त की, जांच की छूट

Sep 25, 2026 - 19:40
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मऊ के 15 सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत:हाईकोर्ट ने बिना सुनवाई की गई कार्रवाई निरस्त की, जांच की छूट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ के 15 सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि सरकारी कार्यालय में नियुक्ति से जुड़े अभिलेख नहीं मिलने मात्र से शिक्षकों की नियुक्ति को फर्जी या धोखाधड़ीपूर्ण नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने शिक्षकों के खिलाफ की गई कार्रवाई और प्रतिकूल आदेशों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही का मामला हो सकता है। इसके लिए शिक्षकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि अदालत ने कानून के अनुसार नए सिरे से निष्पक्ष जांच की छूट दी है। 2010 से 2016 के बीच हुई थी नियुक्तियां रजनीश उपाध्याय समेत 15 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने वेतन रोकने और नियुक्तियों को फर्जी बताकर की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचियों के मुताबिक, उनकी नियुक्तियां 2010 से 2016 के बीच मऊ के राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में हुई थीं। नियुक्तियों को तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से अनुमोदन मिला था। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक वेतन भी मिलता रहा। 2025 की जांच में नहीं मिले अनुमोदन के अभिलेख वर्ष 2025 में विभागीय जांच के दौरान शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े अनुमोदन के अभिलेख नहीं मिले। इसके आधार पर विभाग ने नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की और वेतन रोक दिया। शिक्षकों ने कोर्ट में कहा कि वर्ष 2018 में हुई जांच में उनकी नियुक्तियां सही पाई गई थीं। उनका यह भी कहना था कि पुलिस की विवेचना में उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला नहीं पाया गया। इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। बिना सुनवाई वेतन रोकना भी उचित नहीं हाईकोर्ट ने कहा कि केवल अभिलेख नहीं मिलने के आधार पर शिक्षकों को फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए वेतन रोकना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। नए सिरे से जांच की छूट अदालत ने शिक्षकों के खिलाफ जारी प्रतिकूल रिपोर्ट और आदेश निरस्त कर दिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने की छूट दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान प्रत्येक शिक्षक को अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

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