मऊ में होगा 35 फीट के रावण का वध:मैदान में दिखेगा राम-रावण युद्ध, वानर सेना के साथ लंका पहुंचेंगे
मऊ जिले के दसई पोखरा स्थित दशहरा मैदान में विजयादशमी के अवसर पर ऐतिहासिक दशहरा मेले का आयोजन किया जाएगा। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का मंचन होगा। इसके बाद बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण के विशाल पुतले का दहन किया जाएगा। इस दौरान आकर्षक आतिशबाजी भी होगी। श्री रामलीला मेला समिति, मऊ के महामंत्री संजय वर्मा ने बताया कि दसई पोखरा का दशहरा मेला केवल मऊ शहर ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल की ऐतिहासिक धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि यहां की रामलीला की खासियत यह है कि इसका मंचन किसी एक मंच पर नहीं होता, बल्कि लगभग 12 किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया जाता है। उन्होंने बताया कि रामलीला क्षेत्र में कहीं अयोध्या, कहीं चित्रकूट, कहीं पंपासुर, कहीं किष्किंधा तो कहीं लंका का दृश्य देखने को मिलता है। विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम अपनी वानर सेना के साथ लंका पहुंचते हैं और राम-रावण के बीच भीषण युद्ध होता है। इस दौरान भगवान श्रीराम पुष्पक विमान पर सवार रहते हैं, जबकि रावण हाथी पर सवार होकर युद्ध करता है। अंत में भगवान श्रीराम अपने बाणों से रावण का वध करते हैं। इसके बाद मैदान में स्थापित लगभग 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। गाजीपुर से बनकर आता है रावण का पुतला संजय वर्मा ने बताया कि पहले मऊ में ही रावण का पुतला बनाया जाता था। हालांकि, पुतला बनाने वाले कारीगर के निधन के बाद अब कई वर्षों से गाजीपुर से रावण का पुतला बनवाकर मंगाया जाता है। इस बार भी लगभग 30 से 35 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया गया है, जिसका दहन दशहरा कार्यक्रम के दौरान होगा। सदियों पुरानी है रामलीला की परंपरा
समिति के महामंत्री के अनुसार, मऊ की रामलीला की परंपरा कई सदियों पुरानी है। उन्होंने इसकी ऐतिहासिकता का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां की रामलीला की विशेष पहचान यह है कि इसमें परंपरागत मंच के बजाय विस्तृत क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर रामायण के प्रसंगों का आयोजन किया जाता है। इसी विशेषता के कारण मऊ की रामलीला दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।
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