मऊ पहुंचे ICAR के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट:दलहन-तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर मंथन, जलकुंभी से बने हस्तशिल्प उत्पाद देखे
मऊ में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट रविवार को मऊ पहुंचे। यहां किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें दलहन और तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा हुई। किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम दोपहर 2 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक चला। उन्नत बीज और वैज्ञानिक तकनीकों पर चर्चा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ICAR के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट और कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (ATARI), कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह मौजूद रहे। कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और किसानों ने खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। गोष्ठी में दलहन और तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, उन्नत बीज उत्पादन और सूक्ष्मजीवी तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ नई तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), मऊ के अध्यक्ष डॉ. वीके सिंह, वैज्ञानिक डॉ. आकांक्षा सिंह और डॉ. प्रशांत देव सिंह ने प्रगतिशील किसानों के साथ सहभागिता की। इस दौरान केंद्र की ओर से किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों और वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। जलकुंभी से बने उत्पादों का अवलोकन किया कार्यक्रम के दौरान डॉ. एमएल जाट ने जलकुंभी से तैयार राखी, टोकरी और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद देखे। इन उत्पादों के जरिए प्राकृतिक संसाधनों के सदुपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। जलकुंभी से हस्तशिल्प सामग्री बनाने की पहल को ग्रामीण महिलाओं की आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से की बातचीत डॉ. जाट ने डेयरी गतिविधियों से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की बुजुर्ग महिलाओं से भी बातचीत की। उन्होंने महिलाओं से उनके काम, अनुभव और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली। इस दौरान ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के महत्व पर चर्चा की गई। ATARI, कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए नवीन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और प्रगतिशील किसानों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर भी बात हुई। गोष्ठी में कृषि संस्थानों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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