मुस्कान के नीले ड्रमकांड वाला मकान आज भी बंद:मेरठ में मालिक बोले- 18 महीने से पुलिस का ताला लगा; किराए से गुजारा होता था

Oct 20, 2026 - 05:25
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मुस्कान के नीले ड्रमकांड वाला मकान आज भी बंद:मेरठ में मालिक बोले- 18 महीने से पुलिस का ताला लगा; किराए से गुजारा होता था
मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। लेकिन, इस केस की एक ऐसी कहानी भी है, जिसका दर्द आज तक खत्म नहीं हुआ। 70 साल के ओमपाल के मकान में सौरभ राजपूत की हत्या हुई थी। 18 महीने बाद भी उनके घर का एक हिस्सा पुलिस ने ताला लगाकर सील रखा है। जिस मकान के किराए से कभी ओमपाल और उनकी पत्नी का बुढ़ापा गुजरता था, आज वही मकान उनके लिए परेशानी और बदनामी की वजह बन गया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में ओमपाल की आंखों भर आईं। उन्होंने हाथ जोड़कर पुलिस से कहा- अब तो हमारा घर खोल दो। अब क्यों बंद रखा है? ओमपाल ने कहा- हम घर को न किराए पर दे पा रहे और न ही बेच पा रहे हैं। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों ने दूरी बना ली। लोग मुझे ऐसे देखते हैं, मानो हत्या मैंने की हो। पढ़िए ओमपाल के दर्द की दास्तां… पहले इसी किराए से हमारे घर का खर्च चलता था ओमपाल कहते हैं- सौरभ की हत्या के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। अब लोग हमारे घर को ‘हत्या वाला मकान’ कहते हैं। हमारी गलती सिर्फ इतनी थी कि हमने सौरभ और मुस्कान को अच्छा परिवार समझकर घर किराए पर दे दिया था। सौरभ की हत्या के बाद से मकान का एक हिस्सा 18 महीने से बंद पड़ा है। इससे मुझे काफी नुकसान हो रहा है। पहले इसी किराए से हमारे घर का खर्च चलता था। अब घर पर पुलिस का ताला लगा है। चाबी भी पुलिस के पास ही है। मेन गेट से लेकर अंदर तक सब कुछ सील है। हम अपना मकान इस्तेमाल तक कर पा रहे हैं। जब से वह कांड हुआ, लोगों ने हमारे मकान को बदनाम करना शुरू कर दिया है। लोग मेरा मकान तक देखना पसंद नहीं करते। इस घटना के बाद से हमारी जिंदगी तहस-नहस हो गई है। 200 गज का दो मंजिला मकान, दूसरे हिस्से में मुस्कान रहती थी ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में 200 गज का दो मंजिला मकान 75 साल के ओमपाल का है। इसकी कीमत वो 85 लाख रुपए से ज्यादा बताते हैं। मकान के एक हिस्से में ओमपाल अपनी 65 साल की पत्नी के साथ रहते हैं। मकान के ऊपरी दो हिस्सों में किराएदार रहते हैं। नीचे बगल वाले दूसरे हिस्से में किराए पर मुस्कान-सौरभ और उनकी बेटी रहती थी। ओमपाल ने बताया कि 2022 से सौरभ का परिवार यहां हमारे मकान में किराए पर रहता था। 3500 रुपए महीना किराए पर मकान उन्हें दिया था। बाद में बढ़कर किराया 6 हजार रुपए हो गया था। मकान के इसी हिस्से में बाहर बालकनी, 2 बेडरूम, एक किचन और पीछे छोटा आंगन है। मकान के 2 रास्ते हैं। एक सामने की तरफ खुलता है, दूसरा पीछे की गली में खुलता है। पुलिस ताला खोल नहीं रही, हमें कुछ बताया नहीं जा रहा अब तो मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा भी हो चुकी है। हमारा घर खुल जाना चाहिए। घर को खुलवाने के लिए हमने काफी समय पहले 10 हजार रुपए में एक वकील भी किया था। वकील ने 5 हजार रुपए ले भी लिए, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। मकान पर आज भी पुलिस का ताला पड़ा है। ये ताला कोर्ट-कचहरी का नहीं, बल्कि ब्रह्मपुरी थाना पुलिस का है। पुलिस ये ताला खोल भी नहीं रही, न हमें कुछ बताया जा रहा। हमें बहुत नुकसान हुआ है। हमने अंदर झांक कर तक नहीं देखा। मकान खराब होता जा रहा है। हमने पुलिसवालों से भी कहा था कि एक बार घर देखने दें। लेकिन, पुलिस ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद ही मकान खोला जाएगा। 18 महीने बाद घर में आज भी सारा सामान वैसा ही पड़ा है ओमपाल ने कहा- घर में सब कुछ वैसा ही पड़ा है, जैसा 17 मार्च, 2025 को मुस्कान छोड़कर गई थी। हमने तो उसी दिन से अपना घर नहीं देखा। यहां आंगन में सौरभ की लाई वॉशिंग मशीन, मुस्कान, उसकी बेटी के कपड़े, डस्टबिन सब वैसा ही पड़ा है। हमने कुछ छुआ तक नहीं। हमें मुस्कान-सौरभ का कोई सामान नहीं चाहिए। वो सारा सामान जो चाहे, वो ले जाए। पुलिस उस सामान का जो चाहे, वो करे। हमें मतलब नहीं है। बस हमें हमारा घर वापस मिल जाए। बुढ़ापे में हम पति-पत्नी का शरीर लाश की तरह रह गया ओमपाल रुंधे गले से कहते हैं- बस किसी तरह खुद को संभाल कर यहां बैठा हूं। इस केस ने हमें हर तरह से तोड़ दिया है। हम मानसिक, सामाजिक और आर्थिक हर तरह से बर्बाद हो गए हैं। एक साल में मेरा करीब 25 किलो वजन कम हो गया। अब मैं शुगर, बीपी और हार्ट का मरीज हूं। ज्यादा देर चल भी नहीं पाता। बैठने-उठने में दिक्कत होती है। शरीर बहुत कमजोर हो गया है। मेरी आंखों की रोशनी भी लगभग चली गई है। ऑपरेशन कराया था, लेकिन तनाव की वजह से वह भी सफल नहीं हो पाया। अब ठीक से देख भी नहीं पाता। बुढ़ापे में अब हम पति-पत्नी का शरीर एक लाश की तरह रह गया है, जिसे किसी तरह ढो रहे हैं। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों ने हमसे दूरी बना ली ओमपाल कहते हैं- नीला ड्रम केस के बाद लोगों ने हमसे नाता तोड़ लिया। रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी सभी ने दूरी बना ली है। गली-मोहल्ले के लोग अब हमसे बात तक नहीं करते। लोग आते-जाते हमें घूरकर देखते हैं, जैसे हत्या हमने की हो। अब रिश्तेदार भी हमारे घर आने से डरते हैं। वो कहते हैं कि इस घर पर खौफ का साया है। लोग हमें अपने यहां भी नहीं बुलाते। अगर कोई फोन करता भी है, तो सिर्फ यही पूछता है कि मकान का क्या हुआ या केस कहां तक पहुंचा? इससे ज्यादा कोई बात नहीं करता। कोई ये नहीं पूछता कि हम कैसे रह रहे हैं? मकान का कोई खरीदार भी नहीं मिल रहा ओमपाल ने बताया कि हमें 18 महीने बाद भी किराया नहीं मिला। आगे मिलेगा भी या नहीं, कुछ पता नहीं। लेकिन, बिजली का बिल लगातार आ रहा है। हमने मकान बेचने का भी सोचा। कई प्रॉपर्टी डीलर से बात की, लेकिन कोई ग्राहक यह घर खरीदना नहीं चाहता। बगल वाले पोर्शन में हुई इस घटना की वजह से पूरा 200 गज का मकान बदनाम हो गया। करोड़ की कीमत वाले घर पर एक दाग लग गया है। अब इस मकान को देखने तक कोई नहीं आता। पड़ोसी के नाते किराए पर दिया था मकान ओमपाल कहते हैं कि सौरभ बहुत सीधा और सज्जन लड़का लगा। उसी ने मुझसे किराए पर मकान मांगा था। साथ में परिवार भी था, इसलिए हमने मकान दे दिया। बाद में पता चला कि मुस्कान का मायका भी पास में ही है। पड़ोस होने की वजह से हमें और भरोसा हो गया था। जब हमने मकान किराए पर दिया था, तब सौरभ भारत में ही रहता था। सौरभ और मुस्कान दोनों अच्छे से रहते थे। बाद में सौरभ नौकरी के लिए लंदन चला गया। इसके बाद मुस्कान अपनी बेटी के साथ घर में अकेली रहती थी। हर महीने सौरभ लंदन से ऑनलाइन पैसे भेजता था। मुस्कान मुझे किराया नकद देकर जाती थी। बिजली का बिल भी समय पर जमा होता था। किराए को लेकर कभी परेशानी नहीं हुई। मुस्कान और सौरभ दोनों अच्छे किराएदार थे। हमें उनसे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। घर में हम दोनों बुजुर्ग ही रहते थे। बगल में छोटा बच्चा और परिवार रहने से हमें भी अच्छा लगता था। सिर्फ एक बेटा था, उसकी भी मौत हो गई ओमपाल मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि यहां खंदक बाजार में मेरा कपड़ों का कारोबार था। इसी वजह से हमने यहां घर बना लिया और यहीं बस गए। हमारा एक ही बेटा था। उसकी शादी हो गई थी, लेकिन शादी के 2 साल बाद ही उसकी मौत हो गई। 25 साल की उम्र में बेटा गुजर गया। बेटे की मौत के बाद बहू की दूसरी शादी करा दी। उम्र बढ़ने पर अपना कारोबार भी बंद कर दिया। अब इसी मकान के किराए से हमारा गुजारा चलता था। किराएदारों से जो पैसा आता था, उसी से मैं और मेरी पत्नी अपना गुजारा करते थे। अब बस यही चाहते हैं कि मकान बिक जाए और अपने गांव वापस जाएं। ----------------------------- ये खबर भी पढ़िए- नामर्द कहने वाली राखी सावंत बोलीं- जेल जाना मंजूर: झांसी के लड़के को बेइज्जत किया था, सदमे में मौत हुई; कोर्ट ने वारंट जारी किया था झांसी कोर्ट ने शनिवार को बॉलीवुड अभिनेत्री राखी सावंत के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। 16 साल पहले ‘राखी का इंसाफ’ शो में राखी सावंत ने झांसी के रहने वाले 24 साल के लक्ष्मण प्रसाद अहिरवार को नामर्द कहकर बेइज्जत किया था। पढ़ें पूरी खबर…

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