नाग पंचमी आज:जीवित सांप को दूध पिलाने से बचें, नाग देव की प्रतिमा की पूजा करें, जानिए पूजा विधि और नाग पंचमी की कथा

Aug 21, 2026 - 01:01
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नाग पंचमी आज:जीवित सांप को दूध पिलाने से बचें, नाग देव की प्रतिमा की पूजा करें, जानिए पूजा विधि और नाग पंचमी की कथा
आज (सोमवार, 17 अगस्त) नाग पंचमी है। ये नाग देव की पूजा करने का पर्व है। भगवान शिव के गले में नाग के विराजमान होने के कारण नाग पूजा का संबंध शिव पूजा से भी है। शिवलिंग के साथ नाग प्रतिमा स्थापित करने की मान्यता को दर्शाती है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं की रक्षा करने का संदेश देता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शास्त्रों में नागों से संबंधित अनेक कथाएं मिलती हैं। हिंदू धर्म में पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों को भी सम्मान देने की परंपरा है, क्योंकि प्रकृति के प्रत्येक जीव का अपना अलग महत्वपूर्ण स्थान है। नाग पंचमी से जुड़ी है जनमेजय और आस्तिक मुनि की कथा नाग पंचमी के पीछे महाभारत काल से जुड़ी एक पौराणिक कथा बताई जाती है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को राजा बनाया और स्वयं स्वर्ग की यात्रा पर चले गए। इसके कुछ समय बाद राजा परीक्षित की मृत्यु नागराज तक्षक के डंसने से हुई। परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने जब अपने पिता की मृत्यु का कारण जाना, तो उन्होंने नागों से बदला लेने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने ऐसा यज्ञ कराया, जिसमें पृथ्वी के सभी नाग आहुति के रूप में यज्ञ कुंड में आकर गिरने लगे। बड़ी संख्या में नाग यज्ञ की अग्नि में गिर रहे थे। यह देखकर आस्तिक मुनि राजा जनमेजय के पास पहुंचे। उन्होंने जनमेजय को समझाया कि सभी नागों को नष्ट करना उचित नहीं है। आस्तिक मुनि के हस्तक्षेप के बाद जनमेजय ने यज्ञ रोक दिया। मान्यता है कि यह घटना सावन शुक्ल पंचमी को हुई थी। इसी वजह से इस तिथि पर नागों की रक्षा करने का संकल्प लेने और नाग पूजा करने की परंपरा है। एक अन्य मान्यता है कि यज्ञ की अग्नि शांत करने के लिए आस्तिक मुनि ने उसमें दूध अर्पित किया था। इसी वजह नाग पंचमी पर नाग देवता को दूध चढ़ाने की परंपरा है। शास्त्रों में नागों का जिक्र पं. मनीष शर्मा के अनुसार, ग्रंथों में नागों को एक अलग लोक बताया गया है और अनंत नाग, वासुकि, शेषनाग, तक्षक और कालिया जैसे नागों की कथाएं हैं। नाग पंचमी पर नाग देव की पूजा करते समय अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल, शंखपाल, कालिया और तक्षक का स्मरण करना चाहिए। भगवान शिव नाग को गले में धारण करते हैं, यह इस बात का प्रतीक है कि प्रकृति के प्रत्येक जीव के प्रति सम्मान का भाव रखा जाना चाहिए। भगवान शिव भी सृष्टि के प्रत्येक जीव से समभाव रखते हैं यानी सभी जीवन भगवान के लिए एक समान हैं। खेत और अनाज की सुरक्षा में सांपों की भूमिका नाग प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सांप चूहों का शिकार करते हैं, जिससे चूहों की संख्या नियंत्रित रहती है। अगर सांप चूहों को न खाए और चूहों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ जाए, तो वे खेतों में खड़ी फसलें और अनाज का काफी नुकसान होगा। इस दृष्टि से नाग पूजा में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव भी दिखाई देता है। इसलिए नाग पंचमी पर किसान खासतौर पर नाग देव की पूजा करते हैं। जीवित सांप की पूजा करने और उसे दूध पिलाने से बचें नाग पंचमी पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा के लिए जीवित सांप को पकड़कर उसके साथ धार्मिक अनुष्ठान न किया जाए। सांप जंगली जीव हैं और उनके करीब जाना व्यक्ति और सांप, दोनों के लिए जोखिम भरा है। सांप को दूध पिलाने की परंपरा के बावजूद जीवित सांप को दूध देना उसकी सेहत के लिए सही नहीं है। सांप सामान्य रूप से दूध पीने वाले जीव नहीं हैं और दूध उनके लिए प्राकृतिक आहार नहीं है। जबरन दूध पिलाने से उनकी सेहत को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, पकड़े गए सांपों को भीड़ के बीच रखने और उनके साथ छेड़छाड़ करने से उनके लिए खतरा बढ़ता है। इसलिए नाग पंचमी पर जीवित सांप के बजाय नाग देव की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करना ही सुरक्षित और उचित तरीका है।

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