नेपाल सांसद ने भारत-नेपाल सीमा शुल्क का मुद्दा उठाया:भारत में पढ़े, नेपाल पुलिस में रहे, संसद में भारत-नेपाल सीमा पर चर्चा की; पढ़िए सांसद विक्रम थापा की पूरी कहानी
भारत और नेपाल के बीच सिर्फ सीमा नहीं, बल्कि रिश्तेदारी, कारोबार और रोजमर्रा के सफर का भी गहरा रिश्ता है। नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कपिलवस्तु-2 के सांसद विक्रम सिंह थापा ने इसी रिश्ते से जुड़े एक अहम मुद्दे को संसद में उठाया है। उन्होंने 1 अक्टूबर को भारत से नेपाल आने वाले वाहनों पर लगने वाले जुर्माने पर सरकार का ध्यान खींचा। अस्थायी परमिट खत्म होने के बाद दोपहिया वाहनों पर 1,200 रुपये और चारपहिया वाहनों पर 2,500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगता है। थापा ने इस व्यवस्था पर फिर से विचार करने की मांग की है। यह मुद्दा भारत-नेपाल सीमा से जुड़े उन हजारों लोगों को प्रभावित करता है, जिनका कारोबार और परिवार दोनों देशों में फैला है। सिद्धार्थनगर के करीब 2,000 परिवारों की शादियां नेपाल में हुई हैं। पूर्वांचल के सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और बलरामपुर समेत कई जिलों से करीब 10 हजार व्यापारी नेपाल से कारोबार करते हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसे परिवारों की संख्या लगभग एक लाख तक होने का अनुमान है, जिनका नेपाल से सामाजिक और कारोबारी जुड़ाव है। पहले ऑफलाइन होता था काम, अब ऑनलाइन TIV की व्यवस्था भारतीय वाहन लेकर नेपाल जाने की व्यवस्था में अब डिजिटल बदलाव हुआ है। पहले वाहन चालक सीमा पर भंसार कार्यालय पहुंचता था। वाहन की आरसी और चालक का लाइसेंस दिखाकर निर्धारित शुल्क जमा किया जाता था और वाहन के लिए एक दिन या निर्धारित अवधि का भंसार पास लिया जाता था। अब नेपाल में विदेशी वाहनों की अस्थायी पैठारी के लिए Temporary Import of Vehicle यानी TIV की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई है। नेपाल कस्टम विभाग की सूचना के अनुसार 27 मई 2026 से विदेशी वाहनों के लिए National Single Window के माध्यम से TIV की सेल्फ-डिक्लेरेशन व्यवस्था लागू की गई। इसमें वाहन का RC कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन मालिक के पहचान-पत्र जैसी जानकारी देनी होती है। ऑनलाइन घोषणा के बाद सीमा पर कस्टम अधिकारी वाहन का सत्यापन करते हैं। भंसार और रोड परमिट का शुल्क अलग नेपाल जाने वाले भारतीय वाहन चालकों के लिए भंसार और रोड परमिट दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। सीमावर्ती स्तर पर पहले एक दिन के भंसार के लिए चारपहिया वाहन का करीब 500 नेपाली रुपये और मोटरसाइकिल का 200 नेपाली रुपये शुल्क लिया जाता था। रोड परमिट का शुल्क पहले चारपहिया वाहन के लिए करीब 600 नेपाली रुपये और दोपहिया वाहन के लिए 200 नेपाली रुपये बताया जाता था। अब चारपहिया वाहन का रोड परमिट करीब 300 नेपाली रुपये और दोपहिया वाहन का 200 नेपाली रुपये है। इसलिए भंसार और रोड परमिट को एक ही शुल्क समझना सही नहीं है। दोनों की प्रक्रिया अलग है और वाहन की श्रेणी तथा नेपाल में रहने की अवधि के अनुसार देनदारी तय होती है। एक दिन का भंसार कराया तो उसी दिन लौटना जरूरी भारतीय महावाणिज्य दूतावास की उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारतीय नंबर वाले वाहन नेपाल के निकटतम नेपाली शहर या बाजार में एक दिन के लिए जा सकते हैं। इसके लिए सीमा चौकी पर वाहन का पंजीकरण कर Day Pass/Challan लेना होता है। डे-पास पर नेपाल जाने वाले वाहन को उसी दिन भारत लौटना होता है। वापसी के समय पास नेपाल कस्टम यानी भंसार कार्यालय में वापस करना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति एक दिन के लिए भंसार कराकर नेपाल गया और किसी कारण उसी दिन भारत वापस नहीं लौट पाया तो वाहन निर्धारित अवधि से बाहर हो जाता है। ऐसी स्थिति में ओवरस्टे शुल्क या जुर्माने की देनदारी बन सकती है। अगर किसी व्यक्ति को नेपाल में रात रुकना है या निर्धारित सीमा से आगे जाना है तो उसे एक दिन के डे-पास के बजाय वास्तविक प्रवास की अवधि के अनुसार वाहन का पास लेना होता है। बाद में अधिक दिन रुकना पड़ जाए तो अवधि समाप्त होने से पहले संबंधित भंसार कार्यालय से पास की अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया करनी होती है। वापसी के समय EXIT कराना जरूरी नई TIV व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बात EXIT है। नेपाल कस्टम के रिकॉर्ड में वाहन की वापसी दर्ज होना जरूरी है। सिर्फ सीमा पार करके भारत लौट आना पर्याप्त नहीं है। अगर किसी वाहन चालक ने नेपाल में प्रवेश के समय TIV या भंसार कराया, लेकिन वापस भारत आते समय भंसार में EXIT नहीं कराया तो रिकॉर्ड में वाहन की एंट्री बंद नहीं होने की समस्या पैदा हो सकती है। इसके बाद वह व्यक्ति एक सप्ताह, 15 दिन या एक महीने बाद उसी वाहन से दोबारा नेपाल जाता है तो पिछली एंट्री की अवधि और उससे जुड़ी देनदारी की जांच हो सकती है। इसलिए नेपाल से भारत लौटते समय वाहन का EXIT जरूर कराना जरूरी है। जानकारी के अभाव में यह प्रक्रिया पूरी न करने पर बाद में आर्थिक परेशानी हो सकती है। एक दिन का पास, दूसरे दिन वापसी तो जुर्माना मौजूदा व्यवस्था को ऐसे समझा जा सकता है कि कोई व्यक्ति एक दिन का भंसार कराकर कार से नेपाल गया। उसे उसी दिन भारत लौटना था, लेकिन किसी कारण वह अगले दिन लौटा। ऐसी स्थिति में वाहन निर्धारित अवधि से अधिक नेपाल में रहा माना जा सकता है और ओवरस्टे की देनदारी बन सकती है। सीमावर्ती स्तर पर वर्तमान में चारपहिया वाहन के लिए 2,500 नेपाली रुपये प्रतिदिन और दोपहिया वाहन के लिए करीब 1,200 नेपाली रुपये प्रतिदिन तक की देनदारी बताए जाने को लेकर वाहन चालकों में चिंता है। हालांकि अंतिम शुल्क संबंधित भंसार कार्यालय में लागू दर के अनुसार ही तय होगा। यही आर्थिक बोझ सांसद विक्रम सिंह थापा द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दे का प्रमुख हिस्सा है। उनका कहना है कि सीमा पार आने-जाने वाले आम लोगों और पर्यटकों के लिए नियम स्पष्ट होने चाहिए, ताकि जानकारी के अभाव में उन्हें बड़ी राशि न चुकानी पड़े। साल में कुल 30 दिन की सीमा भारतीय नंबर वाले वाहनों के लिए नेपाल में रहने की कुल अवधि भी महत्वपूर्ण है। भारतीय महावाणिज्य दूतावास की जानकारी के अनुसार भारतीय पंजीकृत वाहन नेपाल में एक कैलेंडर वर्ष में कुल 30 दिन तक ही रह सकते हैं। शुल्क जमा करने के बावजूद वाहन को एक साल में 30 दिन से अधिक नेपाल में रखने की अनुमति नहीं है। इसलिए बार-बार नेपाल जाने वाले वाहन मालिकों को सिर्फ एक यात्रा की अवधि ही नहीं, बल्कि पूरे साल में नेपाल में वाहन के रहने की कुल अवधि का भी हिसाब रखना होगा। वाराणसी में पढ़ाई, फिर नेपाल पुलिस में दी सेवा विक्रम सिंह थापा की कहानी भारत और नेपाल के बीच पुराने जुड़ाव की एक अलग तस्वीर भी पेश करती है। उनका जन्म नेपाल के गुल्मी में हुआ और उन्होंने भारत के वाराणसी में पढ़ाई की। उपलब्ध नेपाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वे उदय प्रताप कॉलेज, बनारस से विज्ञान के स्नातक हैं। रिपोर्टों में उनकी उम्र 63 वर्ष बताई गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार उन्होंने 1980 से 1987 के बीच उदय प्रताप डिग्री कॉलेज, बनारस में बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद वे नेपाल लौटे और नेपाल पुलिस में सेवा शुरू की। उनकी पुलिस सेवा की शुरुआत इंस्पेक्टर के पद से हुई और आगे चलकर वे एसपी तथा एसएसपी पद तक पहुंचे। नेपाल के काठमांडू, ललितपुर, बांके, रुपन्देही और कपिलवस्तु समेत कई जिलों में उन्होंने पुलिस की जिम्मेदारी संभाली। नेपाली मीडिया ने उन्हें पूर्व एसएसपी और लंबे समय तक तराई क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारी के रूप में दर्ज किया है। पुलिस सेवा के दौरान थापा अपराध जांच, गिरोह नियंत्रण और भूमिगत गतिविधियों के खिलाफ अभियानों में सक्रिय रहे। उपलब्ध रिपोर्टों में यूनिटी घोटाला, पेट्रोलियम चोरी और भूमिगत गतिविधियों से जुड़े भगत सिंह की गिरफ्तारी जैसे मामलों में उनकी भूमिका का उल्लेख मिलता है। पुलिस सेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए 2003 में उन्हें पूर्णशांति पुरस्कार मिलने की जानकारी भी नेपाली मीडिया में प्रकाशित हुई है। पुलिस की वर्दी से राजनीति तक का सफर तय किया पुलिस सेवा के बाद थापा ने राजनीति का रुख किया। 2022 में वे नेपाली कांग्रेस के टिकट पर प्रदेश सभा चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। 2026 के प्रतिनिधि सभा चुनाव से पहले उन्होंने राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी का रुख किया और कपिलवस्तु-2 से उम्मीदवार बने। 8 मार्च 2026 यानी नेपाली संवत 2082 फागुन 23 को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में उन्होंने कपिलवस्तु-2 से जीत दर्ज की। अंतिम परिणाम में थापा को 27,635 वोट मिले। नेपाली कांग्रेस के सुरेंद्रराज आचार्य को 21,527 वोट और बृजेश कुमार गुप्ता को 20,482 वोट मिले। थापा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुरेंद्रराज आचार्य को 6,108 वोट के अंतर से हराया। इस जीत के साथ पूर्व एसएसपी विक्रम सिंह थापा नेपाल की प्रतिनिधि सभा में पहुंचे। उनकी राजनीतिक यात्रा में पुलिस सेवा का अनुभव, भारत में शिक्षा और सीमा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों की समझ प्रमुख रूप से सामने आती है। कपिलवस्तु-2 से भारत की सीमा तक है सीधा जुड़ाव थापा का निर्वाचन क्षेत्र कपिलवस्तु-2 भी भारत से जुड़े सामाजिक और आर्थिक रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। कपिलवस्तु जिले में कपिलवस्तु नगरपालिका, बुद्धभूमि नगरपालिका, महाराजगंज नगरपालिका, कृष्णनगर नगरपालिका समेत कई स्थानीय निकाय हैं। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भारत से जुड़े व्यापार और आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। महाराजगंज नगरपालिका की दक्षिणी सीमा भारत से लगती है। कपिलवस्तु और सिद्धार्थनगर के बीच ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक संबंध भी हैं। भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों के कारण भारत और नेपाल के बीच धार्मिक पर्यटन का भी मजबूत संपर्क है। सिद्धार्थनगर के सीमावर्ती इलाकों में इस मुद्दे की अहमियत इसलिए ज्यादा है क्योंकि यहां से नेपाल के साथ रोजाना का संपर्क सीधे दिखाई देता है। बढ़नी-कृष्णनगर और खुनुवा जैसे मार्गों से मालवाहक और यात्री वाहन दोनों देशों के बीच चलते हैं। ककरहवा और अलीगढ़वा भी भारत-नेपाल संपर्क के प्रमुख सीमा मार्ग हैं। सीमा पर रहने वाले परिवारों के लिए नेपाल जाना किसी दूसरे देश की यात्रा से ज्यादा रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। ऐसे में वाहन भंसार, TIV, रोड परमिट, पास की अवधि और वापसी के समय EXIT से जुड़े नियमों का असर पर्यटकों, कारोबारियों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले लोगों पर पड़ सकता है। संसद में मुद्दा उठाने के पीछे सीमा के लोगों की है परेशानी थापा ने सरकार से वाहन की अस्थायी पैठारी की अवधि समाप्त होने के बाद लगाए जाने वाले जुर्माने की व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की। उनका तर्क है कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक संबंध हैं। सीमा पार आने-जाने वाले लोगों के लिए नियम स्पष्ट और व्यावहारिक होने चाहिए। पर्यटकों के लिए भंसार से जुड़ी प्रक्रिया को सरल करने, वाहन की अस्थायी पैठारी की प्रक्रिया को समझने में आसानी और अवधि समाप्त होने पर लगने वाले आर्थिक बोझ को कम करने की मांग इसी संदर्भ में सामने आई है। विक्रम सिंह थापा की राजनीतिक पहचान को सिर्फ एक सांसद के रूप में देखने के बजाय उनकी पूरी यात्रा में भारत और नेपाल के संबंधों की झलक मिलती है। भारत के वाराणसी में शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने नेपाल पुलिस में सेवा की। पुलिस अधिकारी के रूप में उन्होंने नेपाल के कई महत्वपूर्ण जिलों में काम किया। फिर राजनीति में आए और 2026 में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कपिलवस्तु-2 से प्रतिनिधि सभा पहुंचे। अब उनकी संसद में उठाई गई आवाज का सीधा संबंध उसी क्षेत्र से है, जहां भारत और नेपाल की सीमा परिवारों, व्यापारियों, पर्यटकों और कारोबारियों के रोजाना के जीवन का हिस्सा है। 1 अक्टूबर को संसद में वाहन जुर्माने और भंसार व्यवस्था का मामला उठाना उनकी इसी नई भूमिका का हिस्सा है।
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