नगर निगम के JE बालेंद्र प्रताप को हाईकोर्ट से राहत:टेंडर घोटाले में शासन ने किया था सस्पेंड, विभागीय जांच रहेगी जारी

Oct 16, 2026 - 21:22
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नगर निगम के JE बालेंद्र प्रताप को हाईकोर्ट से राहत:टेंडर घोटाले में शासन ने किया था सस्पेंड, विभागीय जांच रहेगी जारी
कानपुर नगर निगम में फर्मों के पंजीकरण और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में निलंबित अवर अभियंता बालेंद्र प्रताप सिंह को हाईकोर्ट ने राहत दी है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनका निलंबन आदेश निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि निर्माण कार्यों से जुड़े आरोपों के मामले में निलंबन के लिए जरूरी आधार स्पष्ट नहीं किए गए थे। हालांकि, विभागीय जांच जारी रखने की छूट दी गई है। नगर निगम के अभियंत्रण विभाग में बालेंद्र प्रताप सिंह अवर अभियंता हैं। उन्होंने 11 सितंबर को जारी अपने निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि निलंबन आदेश में यह उल्लेख नहीं था कि आरोप साबित होने पर उनके खिलाफ बड़े दंड की संभावना है। निलंबन के लिए यह महत्वपूर्ण आधार है। विशिष्ट आरोप और जरूरी संतुष्टि नहीं मिली मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि निर्माण कार्यों को लेकर याचिकाकर्ता के खिलाफ विशिष्ट आरोप स्पष्ट नहीं थे। साथ ही, आदेश में यह प्रथम दृष्टया संतुष्टि भी दर्ज नहीं थी कि आरोप साबित होने पर उन्हें बड़ा दंड दिया जा सकता है। इन कमियों के आधार पर कोर्ट ने निलंबन आदेश को त्रुटिपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने 6 अक्टूबर को यह निर्देश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित विभाग नियमानुसार विभागीय जांच जारी रख सकता है। 11 सितंबर को शासन ने किया था निलंबित नगर निगम में फर्म पंजीकरण और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की गोपनीय विभागीय जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अवर अभियंता (सिविल) आकाशदीप और बालेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया था। इसके बाद 11 सितंबर को शासन ने दोनों को निलंबित कर दिया था। बालेंद्र प्रताप सिंह पर जोन-6 के वार्ड-17 के अंतर्गत खेड़ा गांव की आंतरिक गलियों की मरम्मत के काम की निगरानी नहीं करने का आरोप लगाया गया था। अब हाईकोर्ट से निलंबन आदेश निरस्त होने के बाद भी इस मामले में विभागीय जांच जारी रह सकेगी।

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