NHM संविदा कर्मियों ने न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण मांगा:पांच सूत्रीय मांगों को लेकर CMO कार्यालय में की नारेबाजी, अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी

Oct 05, 2026 - 16:54
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NHM संविदा कर्मियों ने न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण मांगा:पांच सूत्रीय मांगों को लेकर CMO कार्यालय में की नारेबाजी, अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी
महोबा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सीएमओ कार्यालय पर सोमवार समय तीन बजे जोरदार प्रदर्शन किया। जिला संयोजक शिवचरन पाल के नेतृत्व में पहुंचे कर्मियों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर नारेबाजी की। कर्मियों ने न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने, नियमितीकरण, स्थानांतरण नीति और सामाजिक सुरक्षा की मांग उठाई है। मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी गई है। ​महोबा जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम के संविदा कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में एकत्र हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी वर्षों पुरानी और लंबित मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। हाथों में मांगों की तख्तियां और बैनर लिए कर्मियों ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सीएमओ को सौंपा। कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा। देश के अन्य राज्यों और उत्तर प्रदेश के ही दूसरे विभागों में संविदा कर्मियों को वेतन वृद्धि, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जा चुका है, जबकि एनएचएम कर्मियों को इससे वंचित रखा गया है। संयुक्त संघर्ष समिति ने अपनी पांच प्रमुख मांगें शासन के सामने रखी हैं जिसमें एनएचएम कर्मियों का न्यूनतम वेतन ₹18,000 प्रतिमाह तय किया जाए और अनुभव के आधार पर पारदर्शी वेतन वृद्धि लागू हो।, दीर्घकाल से कार्यरत कर्मियों और 6 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सीएचओ को राज्य स्वास्थ्य व्यवस्था में समाहित कर नियमित किया जाए। खाली पदों को जल्द भरा जाए और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू की जाए। सभी कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिले। आउटसोर्स कर्मियों का समायोजन कर उन्हें सेवा निगम का लाभ दिया जाए।कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चरणबद्ध आंदोलन को और तेज करेंगे और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।

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