NRLM कैडरों का प्रदर्शन, ₹18 हजार मानदेय की मांग:महोबा में लंबित भुगतान और मोबाइल सुविधा के लिए डीएम को सौंपा ज्ञापन

Oct 13, 2026 - 16:35
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NRLM कैडरों का प्रदर्शन, ₹18 हजार मानदेय की मांग:महोबा में लंबित भुगतान और मोबाइल सुविधा के लिए डीएम को सौंपा ज्ञापन
महोबा में मंगलवार समय ढाई बजे NRLM कैडरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर डीएम के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। मीना राजपूत के नेतृत्व में चारों ब्लॉकों की महिलाओं ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर मानदेय ₹18,000 करने, समय पर भुगतान, पेंडिंग मानदेय जारी करने और मोबाइल सुविधा की मांग की। कैडरों का कहना है कि काम हर महीने लिया जाता है, लेकिन मानदेय सालों तक रोका जाता है। 10 दिन का आश्वासन मिला है, मांगें न पूरी होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली NRLM यानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की कैडर महिलाओं ने आज महोबा जनपद में अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी। गाँव-गाँव जाकर स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने और महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने वाली ये FLCRP, बैंक सखी और अन्य कैडर आज सड़क पर उतरने को मजबूर हैं। मीना राजपूत के नेतृत्व में चारों ब्लॉकों से बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने डीएम कार्यालय के सामने अपनी आवाज बुलंद की। पुष्पा यादव, कीर्ति, सरिता, ज्योति सिंह, रचना, जयवती, नीलम, राजाबाई, संगीता, शोभा और पार्वती समेत दर्जनों महिलाओं की मौजूदगी में डीएम को एक ज्ञापन सौंपा गया। कैडरों का सीधा और तीखा सवाल है कि जब सरकार उनसे हर महीने काम लेती है, तो मानदेय वर्षों तक क्यों अटकाया जाता है? महिलाओं का कहना है कि ₹2,000 के मामूली मानदेय में आज के दौर में गुजारा संभव नहीं है, और वह भी 2 से 3 सालों तक नहीं मिलता। ​श्रमिकों के न्यूनतम मानदेय के तहत ₹18,000 प्रतिमाह मानदेय तय किया जाए। ​हर महीने समय पर नियमित भुगतान सीधा कैडर के व्यक्तिगत बैंक खाते में हो। ​वर्षों से लंबित बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए। ​काम की सहूलियत के लिए मोबाइल भत्ता, मोबाइल सेट और आधिकारिक पहचान पत्र उपलब्ध कराए जाएं।मीना राजपूत ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें 10 दिनों के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। साथ ही यह मांग भी रखी गई है कि उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक प्रेषित किया जाए। महिलाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के भीतर उनका पेंडिंग मानदेय और अन्य मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अपने हक के लिए फिर से बड़ा कदम उठाने को बाध्य होंगी।

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