नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता के दरबार में उमड़े भक्त:काशी में मंदिर के बाहर 1KM लगी लंबी लाइन, विद्यार्थियों ने भी मांगा आशीर्वाद

Oct 15, 2026 - 09:33
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नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता के दरबार में उमड़े भक्त:काशी में मंदिर के बाहर 1KM लगी लंबी लाइन, विद्यार्थियों ने भी मांगा आशीर्वाद
शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन गुरुवार को वाराणसी के जैतपुरा स्थित स्कंदमाता मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भोर 4 बजे से ही भक्त मंदिर पहुंचने लगे। सुबह से मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर मां स्कंदमाता के दर्शन किए। भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मंदिर में मां को पंचामृत स्नान कराने के बाद विशेष शृंगार किया गया। विद्यार्थियों ने भी मां के दर्शन कर बेहतर शिक्षा, एकाग्रता और सफलता का आशीर्वाद मांगा। पंचामृत स्नान के बाद हुआ शृंगार नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता का विधि-विधान से पूजन किया गया। पंचामृत स्नान के बाद माता का भव्य शृंगार हुआ। उन्हें गुड़हल, गेंदा और गुलाब के फूल अर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने नारियल, चुनरी और पीली बर्फी समेत अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई। मंदिर के बाहर तक भक्तों की कतार लगी रही। अपनी बारी आने पर श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर सुख-शांति की प्रार्थना की। विद्यार्थियों ने भी किए दर्शन मां स्कंदमाता की पूजा के लिए बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी मंदिर पहुंचे। विद्यार्थियों ने मां के सामने शीश नवाकर पढ़ाई में सफलता और एकाग्रता का आशीर्वाद मांगा। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की आराधना से ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना की। मां की पूजा से दूर होते हैं कष्ट : महंत गोपाल मिश्र मंदिर के महंत गोपाल मिश्र ने बताया कि मां स्कंदमाता अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। जिस प्रकार मां अपने बच्चों को ममता और वात्सल्य प्रदान करती हैं, उसी प्रकार मां स्कंदमाता भी अपने भक्तों को स्नेह और आशीर्वाद देती हैं। उनकी आराधना से भक्तों के जीवन में सुख-शांति आती है और बिगड़े हुए काम बनने की मान्यता है। महंत ने बताया कि मां के दर्शन-पूजन के साथ दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से विधि-विधान के साथ माता की आराधना करने और धार्मिक आस्था के अनुरूप पूजा-पाठ करने की अपील की। भगवान कार्तिकेय की माता होने से पड़ा स्कंदमाता नाम धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है। भगवान स्कंद की माता होने के कारण देवी के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां स्कंदमाता को वात्सल्य, ममता, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। देवी के इस स्वरूप में मां अपने पुत्र स्कंद को गोद में धारण करती हैं। उनकी उपासना से संतान सुख, पारिवारिक मंगल और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की जाती है। धार्मिक परंपराओं में मां को विद्यावाहिनी, माहेश्वरी और गौरी जैसे नामों से भी संबोधित किया जाता है।

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