फिरोजाबाद से भागा इंतजार, अलीगढ़ में बनाया चरस का सेंटर:अलीगढ़ टीम ने पकड़ा था इंतजार का रैकेट,अनूपशहर रोड पर जमाया ठिकाना; नेपाल से खेप मंगाकर लुधियाना भेजने का आरोप, पत्नी समेत फरार
फिरोजाबाद में चरस तस्करी के 6-7 मुकदमों में नाम आने के बाद वहां से निकला इंतजार अलीगढ़ में आकर चरस तस्करी का नया नेटवर्क खड़ा करने लगा। करीब छह-सात महीने पहले अनूपशहर रोड क्षेत्र में ठिकाना बनाने के बाद वह नेपाल और बिहार से आने वाली चरस की खेप अलीगढ़ में उतरवाकर आगे पंजाब भेजने लगा। रविवार को 45 किलो चरस के साथ चार तस्करों की गिरफ्तारी के बाद एफआईआर में इंतजार और उसकी पत्नी नरगिस का नाम सामने आया है। दोनों पुलिस कार्रवाई से पहले ही फरार हो गए। अब अलीगढ़ और फिरोजाबाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
14 किलो की बरामदगी में भी सामने आया था नाम
पुलिस के मुताबिक, अलीगढ़ में पिछले दिनों 14 किलो चरस की बरामदगी के मामले में पूछताछ के दौरान भी इंतजार का नाम सामने आया था। उस समय भी वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया। अब उसी नेटवर्क से जुड़े चार तस्करों की गिरफ्तारी ने इंतजार की भूमिका को फिर जांच के केंद्र में ला दिया है। पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड के साथ अलीगढ़ में बनाए गए नेटवर्क की भी कड़ियां जोड़ रही है।
अलीगढ़ में खपत नहीं, खेप बदलती थी रास्ता
जांच में सामने आया है कि नेपाल से चरस भारत लाई जाती थी। बिहार के रास्ते इसे अलीगढ़ तक पहुंचाया जाता और यहां इंतजार को डिलीवरी दी जानी थी। इसके बाद खेप लुधियाना, पंजाब समेत दूसरे राज्यों तक पहुंचाई जाती थी। यानी पुलिस जांच के मुताबिक अलीगढ़ इस नेटवर्क में चरस की खपत का मुख्य ठिकाना नहीं, बल्कि नेपाल-बिहार से आने वाली खेप को आगे भेजने का ट्रांजिट सेंटर था।
इनोवा में गुप्त जगह बनाकर छिपाई थी 45 किलो चरस
रविवार को सिविल लाइंस पुलिस और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग की टीम ने बिहार के पूर्वी चंपारण निवासी सुशील कुमार चौरसिया, दीपक कुमार, अनवर आलम और नेपाल के मोरंग निवासी सूरज कुमार शाह को गिरफ्तार किया था। इनोवा की खिड़कियों के प्लास्टिक कवर के भीतर बनाए गए गुप्त हिस्सों से चरस के 83 पैकेट बरामद हुए। आरोपियों के पास से 8 पैकेट अलग मिले। कुल 91 पैकेटों में 45 किलो चरस मिली।
पुलिस के हिसाब से 5 करोड़, बाजार में कई गुना ज्यादा
पुलिस ने बरामद चरस की कीमत करीब 5 करोड़ रुपये आंकी है। वहीं बाजार में इसकी कीमत पुलिस के आकलन से करीब तीन से चार गुना अधिक बताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के जरिए इससे पहले कितनी खेप अलीगढ़ लाई गईं और आगे भेजी गईं।
नेपाल से संतोष पटेल, आगे इंतजार की कड़ी
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने नेपाल के बीरगंज निवासी संतोष पटेल के जरिए चरस मंगाने की बात बताई है। पुलिस के मुताबिक, नेपाल से माल गाड़ी में लोड कर बिहार के रास्ते अलीगढ़ लाया जाता था। यहां इंतजार को डिलीवरी दी जानी थी और इसके बाद पंजाब तक सप्लाई की जाती थी। पुलिस अब संतोष पटेल से लेकर इंतजार और आगे के खरीदारों तक पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
पत्नी के नाम की कार, धार्मिक झंडे की भी जांच
एफआईआर में जिस इनोवा का उल्लेख है, वह बिहार नंबर की है और पुलिस वाहन के स्वामित्व समेत उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। कार पर धार्मिक झंडा लगा होने की बात भी सामने आई है। पुलिस यह पता कर रही है कि इस वाहन का इस्तेमाल पहले भी तस्करी की खेप लाने-ले जाने में किया गया था या नहीं।
सीओ सर्वम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और पूर्व में सामने आए मामलों के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। फरार इंतजार और उसकी पत्नी की तलाश की जा रही है। दोनों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और अलीगढ़ में सक्रिय नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। एक महीने में करीब 60 किलो चरस की बरामदगी, फिर ANTF कहां?
आमतौर पर स्थानीय पुलिस की नशे के खिलाफ कार्रवाई गांजे की बरामदगी तक ज्यादा दिखाई देती है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में चरस की लगातार बरामदगी ने जिले में मादक पदार्थों के नेटवर्क की गहराई सामने ला दी है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रदेश की विशेष एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), जिसका गठन संगठित नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के लिए हुआ है, अलीगढ़ में सक्रिय नेटवर्क पर कितनी प्रभावी नजर रख पा रही है? यूपी पुलिस के अनुसार ANTF विशेष रूप से मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए काम करती है।
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