कोडीन कफ सीरप मामला: 3 आरोपियों से 6 घंटे पूछताछ:बांदा में जेल से कस्टडी रिमांड पर लाए गए, सप्लाई और भुगतान नेटवर्क खंगाला
बांदा में कोडीनयुक्त कफ सीरप की अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में पुलिस ने सोमवार को जेल में बंद तीन आरोपितों से करीब छह घंटे पूछताछ की। पुलिस प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन, प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता और रोहित पांडेय को कस्टडी रिमांड पर लेकर पुलिस लाइन पहुंची। यहां पहले तीनों से अलग-अलग जानकारी ली गई, फिर आमने-सामने बैठाकर बयानों का मिलान कराया गया। पूछताछ में सीरप की खरीद, आगे सप्लाई, भुगतान और दूसरे जिलों तक खेप पहुंचाने वाले संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई गई। सुबह 9:52 बजे जेल से निकाले गए पुलिस सोमवार सुबह करीब 9:52 बजे तीनों आरोपितों को कड़ी सुरक्षा में जेल से लेकर निकली। जेल के बाहर अधिवक्ता और उनके स्वजन भी मौजूद रहे। इसके बाद तीनों को पुलिस लाइन लाया गया। पूछताछ के दौरान सीओ बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी, बिलगांव चौकी प्रभारी और विवेचक गौरव मिश्रा मौजूद रहे। प्रियांशु से फर्मों और सप्लाई नेटवर्क पर सवाल पुलिस ने प्रियांशु से कोडीनयुक्त कफ सीरप की खरीद और आगे सप्लाई से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी ली। मोबाइल में मिले वाट्सएप चैट और कॉल डिटेल के आधार पर भी सवाल किए गए। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अतर्रा की अलग-अलग फर्मों से सीरप खरीदने की जानकारी सामने आई है। अब संबंधित फर्मों, खरीद के बिल और आरोपित के संपर्कों की पुष्टि की जाएगी। प्रवीण से बैंक खातों और भुगतान की जानकारी ली प्रवीण उर्फ लकी से कारोबार में इस्तेमाल बैंक खातों और भुगतान की व्यवस्था को लेकर पूछताछ की गई। पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि रकम किस तरह जमा होती थी, किन खातों में भेजी जाती थी और भुगतान में कौन लोग शामिल थे। इन जानकारियों का बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों से मिलान किया जाएगा। रोहित से दूसरे जिलों में भेजी गई खेप पर पूछताछ रोहित पांडेय से बांदा से बाहर भेजी जाने वाली खेप के संबंध में सवाल किए गए। पुलिस ने बांदा, चित्रकूट और सतना में माल पहुंचाने वाले लोगों, स्थानों और भुगतान के तरीके की जानकारी जुटाई। 5 घंटे 56 मिनट बाद वापस जेल भेजे गए करीब 5 घंटे 56 मिनट की पूछताछ के बाद दोपहर करीब चार बजे तीनों आरोपितों को वापस जेल भेज दिया गया। अब पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान मिली जानकारियों का मोबाइल चैट, कॉल डिटेल, बैंक खातों, खरीद बिल और अन्य अभिलेखों से मिलान करेगी। इसके आधार पर पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
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